झारखंड के 13 राजकीय पोलिटेक्निक संस्थानों के लिए केवल 81 प्राध्यापक हैं। यहां इन संस्थानों में हर साल 10 हजार विद्यार्थियों का नामांकन होता है, लेकिन इनके लिए केवल 81 प्रध्यापक ही उपलब्ध हैं। जबकि अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद के प्रवधानों के अनुसार 20 विद्यार्थियों पर एक शिक्षक होना जरूरी है। साथा ही 13 पोलिटेक्निक में कुल पांच सौ प्राध्यापक होने जरूरी हैं।
संस्थानों में शिक्षकों की कमी के कारण शैक्षणिक माहौल प्रभावित हो रहा है। इस मामले में सबसे खराब स्थिति खरसावां और लातेहार पोलिटेक्निक की है। राजकीय पोलिटेक्निक खरसावां में केवल प्राचार्य और एकाध प्राध्यापक ही है। राजकीय पोलिटेक्निक धनबाद के प्राचार्य भी जल्द ही सेवानिवृत हो रहे हैं। रांची, बोकारो, जमशेदपुर पोलिटेक्निक में सबसे अधिक प्राध्यापक हैं।
सरकार की ओर से अन्य पोलिटेक्निक को पीपीपी मोड में चलाने के लिए विज्ञापन प्रकाशित किया गया है। राज्य तकनीकी शिक्षा परिषद की ओर से तय मानकों के मुताबिक एक प्राध्यापक को सप्ताह में 16 से 18 घंटा अध्यापन कार्य करना जरूरी है। इसके अतिरिक्त 26 घंटे में शैक्षणिक कार्य के अलावा काम करना है।