झारखंड के संतालपरगना में डेंगू की स्थिति खतरनाक हो गई है। लेकिन फिर भी यहां स्वास्थ्य व्यवस्था के बुरे हाल हैं। जामताड़ा छोड़ पांचों जिलों में डेंगू के करीब 165 मरीज मिले हैं। सबसे अधिक प्रभावित जिले पाकुड़ और गोड्डा हैं। पाकुड़ में 100 से भी अधिक डेंगू पीड़ित हैं और गोड्डा में 40 मरीज मिले हैं।
संतालपरगना से झारखंड के चार-चार मंत्री हैं। लेकिन फिर भी सरकारी अस्पतालों में डेंगू के इलाज के लिए दवा या अन्य जांच की सुविधा नहीं है। यही कारण है कि सरकारी आंकड़ों में डेंगू पीड़ितों की संख्या नाममात्र है। अधिकतर मरीज तो मालदा, आसनसोल, पटना, भागलपुर आदि के प्राइवेट नर्सिंग होम या डॉक्टरों से इलाज करा रहे हैं।
हर साल डेंगू की बीमारी होने के बावजूद भी अभी तक संतालपरगना के अस्पतालों में प्राइमरी टेस्ट (एनएस-1) की भी सुविधा नहीं है। पीएचसी, सीएचसी ही नहीं कई सदर अस्पतालों में भी जांच की सुविधा अब तक नहीं है। केवल देवघर सदर अस्पताल और मधुपुर रेफरल अस्पताल में मार्च 2012 से एनएस-1 जांच की सुविधा उपलब्ध करायी गयी है।
पिछले दस दिनों से लगातार डेंगू के मामले आने के चलते सरकार अब हड़बड़ी में इलाज के इंतजाम कर रही है। इसके लिए तीन नंवबर को स्वास्थ्य सचिव ने रांची में सभी जिला मलेरिया पदाधिकारियों की वर्कशॉप की और सभी जिलों में डेंगू जांच के लिए आवश्यक स्क्रीनिंग टेस्ट की सुविधा उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। यह भी निर्देश दिया गया कि सभी पीएचसी में भी एनएस-1 स्क्रीनिंग टेस्ट की सुविधा मुहैया करायें। लेकिन बीमारी तो सरकारी सुविधा का इंतजार नहीं करेगी। जैसे ही इसके लक्षण मरीज में मिलते हैं तो लोग मरीज को लेकर प्राइवेट डाइग्नोस्टिक सेंटर में जांच करवा कर संतुष्ट हो रहे हैं।