नोटबंदी का असर रोजगार गारंटी योजना यानि मनरेगा पर भी दिखना शुरु हो गया है। द टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक योजना के तहत काम पाने वाले लोगों की संख्या में अक्टूबर की तुलना में पिछले महीने 23 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई।
पिछले साल से तुलना करें तो नवंबर महीने में मनरेगा के तहत काम पाने वाले लोगों की संख्या में 55 फीसदी की भारी गिरावट देखी गई। नवंबर में मनरेगा के तहत का चाहने पर भी खाली हाथ रह जाने वालों का आंकड़ा 23.4 लाख तक पहुंच गया। इससे पिछले महीने यह संख्या करीब आधी थी।
अखबार से बात करते हुए झारखंड में पश्चिमी सिंहभूम जिले की सुनिया लगूरी बताती हैं, ‘फिलहाल हमलोग 50 रुपये दिहाड़ी पर काम करने के लिए मजबूर हैं। कभी- कभी तो काम मिलने के इंतजार में ही दिन गुजर जाता है।’ वे आगे बताती हैं कि यदि मनरेगा के तहत उन्हें काम दिया जाता तो इससे बड़ी राहत मिलती।
ये आंकड़े बयां कर रहे हैं कि ग्रामीण इलाकों में नोटबंदी के चलते एक यह दर्द भी है, जो गरीब, बेसहारा, मनरेगा पर निर्भर लोगों को सहना पड़ रहा है। इससे पहले लातेहार में मनरेगा मजदूरों ने हर दिन मिलने वाली मजदूरी में 5 रुपये का इजाफा किए जाने का विरोध किया था।