राहुल गांधी की ओर से गुजरात के विकास को टॉफी मॉडल करार देने के बाद नरेंद्र मोदी ने पलटवार किया है।
गुजरात के विकास को टॉफी मॉडल करार देने से नाराज मोदी ने राहुल की तुलना उन बच्चों से की जो अब भी टॉफी और गुब्बारों के पीछे पड़े हैं। मोदी ने कहा कि राहुल पहले गुब्बारा लिए घूम रहे थे और एक खिलौने से जब मन भर गया तो टॉफी पकड़ ली।
मोदी ने कहा कि वह बचपन में चाय बेच कर गुजारा करते थे। उन्हें टॉफी कभी नहीं मिली लेकिन उनकी नजर ट्रॉफी पर जरूर रहती थी।
अब देश को तय करना है कि उसे टॉफी वाला चाहिए या ट्रॉफी वाला
झारखंड के हजारीबाज में एक चुनावी रैली में मोदी ने कहा, मेरा मानना था कि इस चुनाव में गंभीर मुद्दे पर चर्चा होगी क्योंकि लालकृष्ण आडवाणी, सुषमा स्वराज, यशवंत सिन्हा, अरुण जेटली और मुरली मनोहर जोशी जैसे दिग्गज नेता कई अलग-अलग मुद्दों पर बात करते रहे हैं।
लेकिन दूसरी ओर ऐसे खिलाड़ी भी हैं जो अभी तक अपने लड़कपन से नहीं निकल पाए हैं। देश के भविष्य का फैसला करने वाला चुनाव हो रहा है लेकिन राहुल गांधी पिछले दस दिनों से गुब्बारा शब्द ही दोहरा रहे हैं।
अब आप बताइए कि मैं क्या करूं। मैं इस उम्र में नहीं हूं कि गुब्बारे से खेलूं। अब यह लोगों को फैसला करना है कि क्या वे एक ऐसे शख्स को चाहते हैं, जो बैलून और टॉफी के लिए मचलता हो।
मोदी ने संजय बारू की किताब की जिक्र करते हुए कहा कि वह पीएम पर हमला करते आए हैं लेकिन अब उन्हें पता चला है कि उनके पास तो कोई अधिकार ही नहीं था। सारी ताकत तो एक शख्स के हाथ में सिमटी थी।
उन्होंने कहा, मैंने दस साल में मनमोहन सिंह के खिलाफ काफी कड़े शब्दों का प्रयोग किया लेकिन अब लगता है कि मुझे यह नहीं करना चाहिए था।
क्योंकि वह देश को भले चला रहे थे लेकिन उनके पास कोई अधिकार नहीं था। गलती उनकी नहीं बल्कि मां और बेटे की है।
मोदी ने कहा कि प्रधानमंत्री की बेटी उपिंदर सिंह जो कह रही हैं वह सच है। बारू पर उन्होंने विश्वासघात का आरोप लगाया है लेकिन किताब के तथ्यों पर कोई टिप्पणी नहीं की।