झारखंड में अब कोई भी डेवलपर या ब्राेकर मनमाने ढंग से प्लाॅटिंग कर जमीन नहीं बेच सकेंगे। इसके लिए उन्हें ले-आउट प्लान की मंजूरी लेनी हाेगी। जब तक इस प्लान को मंजूरी नहीं मिलेगी, तब तक उस जमीन पर घर का नक्शा पास नहीं हाेगा।
कहां-कहां लागू होगा
ये व्यवस्था नगर पंचायत के अलावा नगर परिषद, नगर निगम और आरआरडीए क्षेत्र में लागू हाेगी। इस मामले पर नगर विकास सचिव अजय कुमार सिंह ने टाउन प्लानर और आरआरडीए अफसराें काे सख्ती बरतने काे कहा है। उनका कहना है कि बिल्डिंग प्लान साॅफ्टवेयर में ले-आउट प्लान की स्वीकृति का प्रावधान होना जरूरी है।
इसे तब तक ही मैनुअली पास किया जाएगा, जब तक साॅफ्टवेयर में यह प्रावधान नहीं हाे जाता। इस प्रस्ताव को नगर विकास मंत्री काे स्वीकृति के लिए भेजने का निर्देश भी दिया गया है।
कुमार का कहना है कि ले-आउट प्लान की स्वीकृति के लिए डेवलपमेंट परमिट फीस भी तय की गई है। इसके लिए नगर पंचायत में एक हेक्टेयर (2.47 एकड़) जमीन के लिए 6 हजार रुपये, 1 से 2.5 हेक्टेयर के लिए 12 हजार और 2.5 से 5 हेक्टेयर के लिए 16 हजार रुपये देने हाेंगे।
वहीं नगर परिषद में एक हेक्टेयर जमीन के लिए 8 हजार, 1 से 2.5 हेक्टेयर के लिए 15 हजार और 2.5 से 5 हेक्टेयर के लिए 20 हजार रुपये देने होंगे। नगर निगम और आरआरडीए क्षेत्र में 1 हेक्टेयर के लिए 10 हजार, 1 से 2.5 हेक्टेयर के लिए 20 हजार और 2.5 से 5 हेक्टेयर के लिए 30 हजार रुपये तय किए गए हैं।