झामुमो और भाजपा में चल रही खींचतान से झारखंड विकास मोर्चा अपने लिये संभावनायें तलाश रहा है। झाविमो की आज से होने वाली दो दिवसीय कार्यसमिति की बैठक को सत्ता हासिल करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। झाविमो के अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने झारखंड के गठन के साथ यहां सरकार बनाई थी।
बाबूलाल मरांडी ने भाजपा से अलग होकर झाविमो का गठन किया था। इस प्रकार पिछले छह वर्षो के प्रयास में उनको अपने नए दल के बैनर तले 11 विधायक हासिल हो सके हैं। वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों को भुनाने में लगे मरांडी और उनके दल ने राज्य की 81 में से 53 विधानसभा क्षेत्रों में सम्मेलन कर लोगों तक अपनी पहुंच बढ़ाने का प्रयास भी किया है।
झाविमो के प्रधान महासचिव प्रदीप यादव का कहना है कि आपसी खींचतान में लगी इस समझौता सरकार के अब सरकार में रहने का कोई मतलब नहीं है। एक वर्ष से यह सरकार बिल्कुल निष्क्रिय बनी हुई है। झाविमो नई सरकार चाहता है और दो दिवसीय कार्यसमिति में इस विषय पर भी विचार होगा।
प्रदीप ने कहा कि कार्यसमिति की बैठक नियमित तौर पर पहले भी होती रही है। इस बैठक में इस बार 29-30 अप्रैल को हुई कार्यसमिति में लिए गए निर्णयों पर अमल की समीक्षा की जाएगी। इस बीच विस्थापन के विरुद्ध आंदोलन चलाने के साथ-साथ स्कूली बच्चों को समय पर किताबें न मिलने, अल्पसंख्यक हितों की उपेक्षा जैसे विषयों पर धारदार कार्यक्रम किए गए। इन विषयों पर शनिवार को पहले विधायकों, केंद्रीय पदाधिकारियों और मोर्चा अध्यक्षों की तकरीबन 40 लोगों की टोली विमर्श करेगी, उसके बाद 250 लोगों की कार्यसमिति का मंथन शुरू होगा।