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Jharkhand: झारखंड में पेसा नियमावली सार्वजनिक, 20 पेज और 17 अध्यायों में तय हुए ग्रामसभा के अधिकार

Sat, 03 Jan 2026 03:58 PM IST
झारखंड ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची

सार

Jharkhand: झारखंड सरकार ने पेसा नियमावली सार्वजनिक की है, जिसमें ग्रामसभा की संरचना, अध्यक्ष, सचिव और अधिकार तय किए गए हैं। वहीं भाजपा ने इसे पेसा कानून की मूल भावना के खिलाफ बताते हुए आदिवासी अधिकार कमजोर करने का आरोप लगाया है।
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हेमंत सोरेन - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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झारखंड सरकार ने पेसा नियमावली को सार्वजनिक कर दिया है। नियमावली का विस्तृत विवरण 20 पेज और 17 अध्यायों में दिया गया है। कैबिनेट से मंजूरी के बाद इसे औपचारिक रूप से लागू करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इसके साथ ही सरकार की ओर से 8 पेज के अलग-अलग आवेदन प्रारूप भी जारी किए गए हैं, जिससे ग्रामसभा के कामकाज को सरल और व्यवस्थित बनाया जा सके।

नियमावली के अनुसार अनुसूचित क्षेत्रों में ग्रामसभा का अध्यक्ष वही व्यक्ति होगा, जिसे परंपरागत रीति-रिवाजों के अनुसार मान्यता प्राप्त हो। संथाल समुदाय में माझी या परगना, हो समुदाय में मनकी या दिउरी, खड़िया समुदाय में डोकलो या सोहोर, मुंडा समुदाय में हातू या पहड़ा बेल, जबकि भूमिज समुदाय में मुंडा, सरदार, नाया या डाकुआ ग्रामसभा के अध्यक्ष बन सकेंगे। ग्रामसभा के सचिव के पद पर संबंधित पंचायत का ही व्यक्ति नियुक्त होगा। वहीं सहायक सचिव ग्रामसभा द्वारा चुने गए पंचायत सहायक या किसी अन्य सदस्य को बनाया जा सकेगा।

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ग्रामसभाओं की मान्यता और सत्यापन की जिम्मेदारी उपायुक्त को सौंपी गई है। इसके लिए प्रखंड स्तर पर टीम गठित करने का प्रावधान किया गया है। उपायुक्त की टीम ग्रामसभा के प्रधान और सदस्यों के साथ मिलकर ग्रामसभा की पहचान और मान्यता सुनिश्चित करेगी। सार्वजनिक स्थानों पर होने वाले झगड़ों पर नियंत्रण और विवादों का समाधान परंपरागत रीति-रिवाजों के अनुसार करना भी ग्रामसभा की जिम्मेदारी होगी।

इधर पेसा नियमावली के सार्वजनिक होते ही भाजपा ने सरकार पर तीखा हमला बोला है। पूर्व नेता प्रतिपक्ष और पूर्व मंत्री अमर कुमार बाउरी ने आरोप लगाया कि सरकार ने पेसा कानून की मूल आत्मा को ही कमजोर कर दिया है। उन्होंने कहा कि जनजातीय परंपराओं को स्पष्ट रूप से परिभाषित नहीं किया गया है, जिससे गैर-आदिवासी भी इसका लाभ उठा सकते हैं।

भाजपा का आरोप है कि वन उपज, खनिज संसाधन और जल स्रोतों पर ग्रामसभा को पूर्ण नियंत्रण देने के बजाय सरकार और जिला प्रशासन ने कई अधिकार अपने पास सुरक्षित रखे हैं, जिससे ग्रामसभा की संवैधानिक शक्तियां कमजोर होती हैं। पार्टी का कहना है कि यह नियमावली मूल पेसा कानून की भावना के विपरीत है। भाजपा ने आदिवासियों के हितों की रक्षा के लिए आंदोलन करने का ऐलान किया है।

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