प्रदर्शन करते भाजपा और सत्तारूढ़ यूपीए कार्यकर्ता
- फोटो : सोशल मीडिया
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने हाल ही में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को समन जारी किया और उन्हें पूछताछ के लिए एजेंसी के कार्यालय पहुंचने को कहा। हालांकि, सोरेन एजेंसी के कार्यालय नहीं पहुंचे, इसके बजाय आदिवासियों के एक कार्यक्रम में सिरकत करने छत्तीसगढ़ पहुंच गए। इसके बाद से राज्य की राजनीति में हंगामा मचा हुआ है।
सोमवार को जहां भाजपा कार्यकर्ताओं ने रांची के नामकुम प्रखंड कार्यालय के बाहर मुख्यमंत्री के खिलाफ प्रदर्शन किया। वहीं दूसरी ओर, यूपीए कार्यकर्ताओं ने भी राजभवन के बाहर विरोध प्रदर्शन किया और केंद्रीय एजेंसियों के कथित दुरुपयोग का आरोप लगाया।
सोरेन ने किया सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत
इस बीच झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने उच्चतम न्यायालय के फैसले का स्वागत किया। सोरेन ने कहा कि जनहित याचिकाओं (पीआईएल) की स्थिरता को स्वीकार करने वाले उच्च न्यायालय के 3 जून के आदेश को खारिज करने के फैसले ने उनके लिए काम करने के संकल्प को मजबूत किया है। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि कथित अवैध खनन मामले में सोरेन के खिलाफ जांच के लिए उच्च न्यायालय में दायर जनहित याचिका विचारणीय नहीं है।
सोरेन ने कहा कि मुझे कानून के शासन और देश के न्यायिक संस्थानों में दृढ़ विश्वास और विश्वास है। सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने दावा किया कि शीर्ष अदालत के आदेश ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सोरेन और उनकी सरकार को एक साजिश के तहत भाजपा द्वारा निशाना बनाया जा रहा है।
इससे पहले मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति यू यू ललित, न्यायमूर्ति एसआर भट और न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की पीठ ने 17 अगस्त को झारखंड सरकार और सोरेन की अलग-अलग याचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। शीर्ष अदालत ने इससे पहले उच्च न्यायालय को खनन पट्टा मामले में सोरेन के खिलाफ जांच की मांग वाली जनहित याचिकाओं पर कार्यवाही से रोक दिया था।