झारखंड में भुखमरी से हुई एक लड़की की मौत के बाद राज्य सरकार सवालों के घेरे में हैं। इस बीच एक अंग्रेजी समाचार चैनल की खबर के अनुसार, आधार की वजह से लोगों को भूख की मार का सामना करना पड़ रहा है। बताया जा रहा है कि जिन लोगों ने अपने आधार नंबर को राशन कार्ड से लिंक नहीं करवाया किया है, उन्हें अनाज पर मिलने वाली सब्सिडी का लाभ नहीं मिल रहा है।
खबर के मुताबिक, 11 साल की लड़की के अलावा 40 साल के रिक्शा चालक का मामला भी सुर्खियों में आया था। इसके बाद राज्य के मुख्यमंत्री रघुबर दास की ओर से आए बयान में भूख से हो रही मौतों को निराधार बताया गया।
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लोगों को राशन कार्ड पर हो रही परेशानियों पर सीएम रघुबर दास ने इसे एक राजनीतिक रंजिश करार दिया है। उनका कहना है कि 99 फीसदी लोगों के कार्ड आधार से लिंक किए जा चुके हैं और इससे राज्य को फायदा पहुंचा है।
सामने आए कई मामले
चैनल की जांच पड़ताल के बाद भुखमरी की कगार पर पहुंच जाने के कई मामले सामने आए हैं। पहला रांची के एक गांव का सामने आया, जहां एक निवासी ने आपबीती में बताया कि उसे खाने पर सब्सिडी इसलिए नहीं मिली क्योंकि उसका राशन कार्ड आधार से लिंक नहीं है। निवासी ने यह भी बताया कि उसने जब अपनी गुजर चुकी मां के राशन कार्ड पर सब्सिडी लेने की कोशिश की तो प्रशासन ने उसके सामने नई शर्त रख दी।
निवासी ने बताया कि फूड सप्लाई के स्टोर मालिक ने कहा की राशन लेने के लिए उसके मां का बॉयोमेट्रिक आईडेंटीफिकेश होना बेहद जरूरी है।
दूसरी ओर धनबाद जैसे बड़े शहर में भी करीब 22 हजार लोगों को ऐसी परेशानी झेलनी पड़ रही है। वहीं रामगढ़ के मंडू ब्लॉक में लोगों का आरोप है कि उन्हें किरोसिन के लिए सफेद कार्ड दे दिया गया है, लेकिन खाने पर सब्सिडी देने वाले पीले कार्ड अभी तक नहीं दिए गए हैं।