झारखंड की राजधानी रांची में शुक्रवार को भड़की हिंसा के तीन दिन बाद भी पुलिस-प्रशासन सतर्क है। चप्पे-चप्पे पर पुलिस की तैनाती की गई है और हिंसाग्रस्त क्षेत्र में धारा 144 लागू है। आ-जा रहे वाहनों की चेकिंग बढ़ा दी गई है। मस्जिद और मंदिर के पास भी भारी पुलिस फोर्स की तैनाती की गई है।
झारखंड की राजधानी रांची में बीते शुक्रवार को भड़की हिंसा मामले में अब केंद्र सरकार सख्त हो गई है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राज्यपाल रमेश बैस से रिपोर्ट मांगी है। बताया जा रहा है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने खुद इस मामले में सख्ती दिखाई है। वहीं गृह मंत्रालय से सूचना मिलते ही राजभवन ने सोमवार को रांची के डीजीपी समेत कई आला अधिकारियों को तलब किया। जानकारी के अनुसार रांची पुलिस आईबी की रिपोर्ट होने के बावजूद स्थिति को संभालने में विफल रही। हालांकि इस मामले पर डीजीपी ने अपनी सफाई दी है।
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राज्यपाल ने डीजीपी समेत कई आला अधिकारियों को किया तलब
झारखंड के राज्यपाल रमेश बैस ने हाल ही रांची में हुई हिंसा को लेकर सोमवार को डीजीपी नीरज सिन्हा और दूसरे वरिष्ठ अधिकारियों को राजभवन में तलब किया। राज्यपाल ने पूछा है कि भीड़ को हटाने के लिए आंसू गैस और पानी की बौछार करने जैसे तरीकों का इस्तेमाल क्यों नहीं किया गया। एहतियाती उपाय करने में प्रशासन विफल क्यों रहा। राजभवन से जारी एक आधिकारिक बयान के मुताबिक अधिकारियों से घटना के बारे में विस्तृत जानकारी मांगी गई है। घटना के पूर्व अधिकारियों के पास क्या सूचना थी और उसके आधार पर भीड़ से निपटने के लिए क्या इंतजाम किए गए थे। राजभवन ने पूछा कि आपके पास खुफिया ब्यूरो (आईबी), अपराध जांच विभाग (सीआईडी) है और विशेष शाखा ने क्या सूचना दी थी? जुलूस के संचालन के दौरान वहां कितने सुरक्षाकर्मी और मजिस्ट्रेट मौजूद थे? आपने कोई एहतियाती कार्रवाई क्यों नहीं की?
पुलिस महानिदेशक ने राज्यपाल बैस को सूचित किया
पुलिस महानिदेशक ने बैस को सूचित किया कि इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) की एक रिपोर्ट के अनुसार, राज्य की राजधानी में 10 जून के विरोध प्रदर्शन के दौरान केवल 150 लोगों के जुटने की सूचना थी। लेकिन हजारों की संख्या में भीड़ जमा हो गई। हमने संभालने की पूरी कोशिश की।