झारखंड में बालू के अवैध कारोबार पर लगाम कसने और सरकारी खजाने को मजबूत करने के लिए हेमंत सरकार ने एक ऐतिहासिक फैसला लिया है। अब रांची जिले में 19 बालू घाटों की ई-नीलामी की जाएगी। इस कदम से न सिर्फ बालू माफियाओं की कमर टूटेगी, बल्कि राज्य सरकार को सालाना करोड़ों रुपये का अतिरिक्त राजस्व भी प्राप्त होगा। जिला खनन कार्यालय द्वारा जारी इस सूचना के बाद से खनन क्षेत्र में हड़कंप मच गया है।
दावा: भ्रष्टाचार और कालाबाजारी खत्म होगी
यह महत्वपूर्ण निर्णय झारखंड बालू खनन नियमावली, 2025 के तहत लिया गया है, जिसे हाल ही में लागू किया गया है। नियमावली के अनुसार, चिह्नित किए गए 19 घाटों को कैटेगरी-2 में रखा गया है। पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी, ताकि कोई भी इसमें गड़बड़ी न कर सके। खनन के इच्छुक आवेदक https://www.jharkhandtenders.gov.in पर आवेदन कर सकते हैं। इसके बाद, ई-बोली की प्रक्रिया शुरू होगी। यह प्रणाली सरकार को पूरी प्रक्रिया पर पूर्ण नियंत्रण रखने में सक्षम बनाएगी, जिससे भ्रष्टाचार और कालाबाजारी खत्म होगी।
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पर्यावरण के लिए अच्छा होगा कदम
यह पहली बार है जब इतनी बड़ी संख्या में घाटों की नीलामी पारदर्शी तरीके से की जा रही है। नीलामी के लिए चुने गए घाटों में कांछी, रारु, पाकरो, सुवर्णरेखा, चट्टी और सपही जैसी प्रमुख नदियों के किनारे स्थित घाट शामिल हैं : कांची नदी : लोहातु, चुरगी, चिलुटीकर, सरजामडीह, अनरेदीह, करम्बू, पांगुरा, बरेदीह, तुनजू, एरकिया, सुमंडीह, सुतिलौंग, बादला, गोमियाडीह, हराडीह, दारूआरा, सोमाडीह। रारु नदी : श्यामनगर, बिरदीडीह, करेयाडीह, इचाहातु। पाकरो नदी : बसंतपुर। स्वर्णरेखा नदी : श्यामनगर, चोकेसेरंग, डुमरबेरा, सुंदील। चट्टी नदी : लपरा। सपही नदी : चूरी व राय। अधिकारियों ने बताया कि ई-नीलामी का विस्तृत कार्यक्रम जल्द ही घोषित किया जाएगा। गौरतलब हो कि यह कदम न केवल राज्य की अर्थव्यवस्था के लिए, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक बड़ा बदलाव लाएगा।
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