Ranchi News: राजधानी रांची दुर्गा पूजा के रंग में डूबने को तैयार है। इस बार पंडालों में कला, परंपरा और भव्यता का संगम देखने को मिलेगा। करोड़ों रुपये की लागत से तैयार हो रहे पंडालों में कहीं कंबोडिया के अंकोरवाट मंदिर का वैभव झलकेगा तो कहीं वृंदावन के प्रेम मंदिर की आभा, जो श्रद्धालुओं को अद्भुत अनुभव कराएगी।
झारखंड की राजधानी रांची दुर्गा पूजा की तैयारियों में रंगने लगी है। हर साल की तरह इस बार भी शहर के पूजा पंडाल अपनी भव्यता और अनोखी थीमों से लोगों को आकर्षित करेंगे। करोड़ों रुपये की लागत से तैयार हो रहे इन पंडालों में कंबोडिया के प्रसिद्ध अंकोरवाट मंदिर से लेकर वृंदावन के प्रेम मंदिर तक की झलक देखने को मिलेगी। अपर बाजार स्थित सत्य अमर लोक पूजा समिति ने इस वर्ष कंबोडिया के विश्वविख्यात अंकोरवाट मंदिर को थीम बनाया है। समिति अध्यक्ष राहुल अग्रवाल ने बताया कि पश्चिम बंगाल से आए कारीगर इस पंडाल को आकार दे रहे हैं। लगभग 90 लाख रुपये की लागत से बन रहे इस पंडाल में सुरक्षा व्यवस्था के लिए 50 सीसीटीवी कैमरे लगाए जा रहे हैं।
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'पश्चिम बंगाल से आए कारीगर दिन-रात मेहनत कर रहे'
राजस्थान मित्र मंडल ने शिक्षा पद्धति को थीम बनाया है। समिति अध्यक्ष अशोक पुरोहित ने कहा कि आज की व्यस्त जिंदगी में अभिभावक बच्चों को समय नहीं दे पा रहे हैं और मोबाइल पर निर्भर हो रहे हैं। इसी विषय पर पंडाल में मोबाइल से होने वाले नुकसान और पारंपरिक शिक्षा पद्धति की अहमियत को झांकी के रूप में दिखाया जाएगा। वहीं, हरमू स्थित पांचमुखी मंदिर परिसर में इस बार वृंदावन के प्रेम मंदिर का अद्भुत स्वरूप तैयार किया जा रहा है। समिति अध्यक्ष मनोज पांडेय उर्फ बबलू ने बताया कि इसकी लागत लगभग 75 लाख रुपये है। यहां भी पश्चिम बंगाल से आए कारीगर दिन-रात मेहनत कर रहे हैं।
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अनोखी थीम से अलग पहचान बना रहे ये पंडाल
स्थानीय श्रद्धालु पवन लोहिया, आशीष डालमिया, शंभू अग्रवाल, सचिन अग्रवाल और सौरभ अग्रवाल ने कहा कि हर साल रांची के तीन से चार पूजा पंडाल अपनी अनोखी थीम से अलग पहचान बनाते हैं। खासकर बकरीबाजार स्थित सत्य अमर लोक समिति का पंडाल सबसे अलग होता है। इस बार अंकोरवाट मंदिर का स्वरूप देखकर उन्हें खासा गर्व और खुशी हो रही है।
अद्भुत कलात्मकता के जरिए नया संदेश
बकरीबाजार स्थित सत्य अमर लोक समिति का पंडाल अपनी भव्यता के लिए मशहूर है। वहीं, दुर्गा बड़ी स्थित बंगाली समाज का पंडाल अपनी परंपराओं और रीति-रिवाजों के लिए खास पहचान रखता है, जहां विसर्जन के दिन सिंदूर खेला का आयोजन होता है। दस दिनों तक चलने वाले इस महोत्सव में इस बार भी रांचीवासियों को अद्भुत कलात्मकता, परंपरा और आधुनिक संदेशों का संगम देखने को मिलेगा।