झारखंड की खनन सचिव पूजा सिंघल को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने गिरफ्तार कर लिया है। ईडी ने यह गिरफ्तारी खूंटी में मनरेगा निधि के कथित गबन और अन्य आरोपों से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में की है। पूजा सिंघल को दो दिनों की पूछताछ के बाद बुधवार को गिरफ्तार किया गया है। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) की 2000-बैच की अधिकारी को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) की प्रासंगिक धाराओं के तहत ईडी ने गिरफ्तार किया है। सूत्रों के मुताबिक, सिंघल जवाब देने में टालमटोल कर रही थीं। इसके बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया। निदेशालय ने सिंघल को हिरासत के लिए एक स्थानीय कोर्ट के सामने पेश किया, जिसके बाद कोर्ट ने उन्हें पांच दिन की हिरासत में भेजने का फैसला सुनाया। ईडी की हिरासत कल से शुरू होगी।
इससे पहले सिंघल सुबह करीब 10.40 बजे रांची के हिनू इलाके में एजेंसी के क्षेत्रीय कार्यालय पहुंचीं। वहीं, वह मंगलवार को भी ईडी के कार्यालय में करीब नौ घंटे तक मौजूद रहीं थीं, जहां उनका बयान दर्ज किया गया था। दरअसल, ईडी ने नौकरशाह, उनके पति, उनसे जुड़ी संस्थाओं और अन्य के खिलाफ छह मई को झारखंड और कुछ अन्य स्थानों पर छापेमारी की थी। मामले में सात मई को चार्टर्ड अकाउंटेंट सुमन कुमार को गिरफ्तार किया गया था।
भाजपा के शासन में मिली थी पूजा को क्लीनचिट: सोरेन
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा, राज्य सरकार इस मामले में जो भी कानूनी कार्रवाई जरूरी होगी शुरू करेगी। जिन अनियमितताओं के लिए पूजा सिंघल को गिरफ्तार किया गया वे भाजपा के शासन में हुईं। 2017 में जब उन्हें क्लीनचिट दी गई तब सत्ता में भाजपा थी। भाजपा ने ही उसे गलत करने दिया और फिर खुद ही क्लीनचिट दे दी। ससोरे ने कहा, क्लीनचिट देने में जो भी लोग शामिल थे सबके खिलाफ जांच होनी चाहिए।
सिंघल के पति से भी हुई थी पूछताछ
ईडी ने नौकरशाह, उनके पति, उनसे जुड़ी संस्थाओं और अन्य के खिलाफ छह मई को झारखंड और कुछ अन्य स्थानों पर छापेमारी के बाद पूछताछ की है। अधिकारियों ने कहा कि एजेंसी ने चार एसयूवी- एक जगुआर, एक फॉर्च्यूनर और दो होंडा ब्रांड की कारें भी जब्त की हैं - जो धनशोधन रोधी कानून के तहत गिरफ्तार सीए सुमन कुमार या उससे जुड़े व्यक्तियों के नाम पर थीं।
क्या है मामला?
सिंघल एवं अन्य के खिलाफ यह मामला धनशोधन से जुड़ा है, जिसमें झारखंड सरकार के पूर्व जूनियर इंजीनियर राम विनोद सिन्हा को ईडी ने 17 जून 2020 को पश्चिम बंगाल से गिरफ्तार किया था। उससे पहले उसके खिलाफ राज्य सतर्कता ब्यूरो की प्राथमिकी का अध्ययन करने के बाद 2012 में एजेंसी द्वारा पीएमएलए के तहत मामला दर्ज किया गया था।
सिन्हा पर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की आपराधिक धाराओं के तहत धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार से संबंधित आपराधिक धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था। उस पर एक अप्रैल 2008 से 21 मार्च 2011 तक जूनियर इंजीनियर के रूप में काम करते हुए कथित तौर पर जनता के पैसे की धोखाधड़ी करके उसे अपने नाम के साथ-साथ अपने परिवार के सदस्यों के नाम पर निवेश करने का आरोप है।
एजेंसी ने पहले कहा था कि उक्त धन को खूंटी जिले में मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) के तहत सरकारी परियोजनाओं के निष्पादन के लिए रखा गया था। सिन्हा ने ईडी को बताया कि "उसने जिला प्रशासन को पांच प्रतिशत कमीशन (धोखाधड़ी में से) का भुगतान किया है।"