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नौकरी के लिए बने माओवादी, और अब हुए बरोजगार

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ये झारखंड के उन पांच सौ चौदह असहाय बेरोजगारों की कहानी है जिन्हें नौकरी के नाम पर माओवादी बना दिया गया, और कई माह तक जेल की दीवारों में कैद रखा गया। इनमें से अधिकतर वे लोग हैं जो गरीब परिवारों से हैं और कर्जा लेकर जो अब सड़क पर आने के कगार पर हैं या चुके हैं।
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इन लोगों के परिवार वालों ने किसी तरह पैसे का इंतजाम किया ताकि उनके बच्चों को सीआरपीएफ में बतौर कांस्टेबल नौकरी मिल सके। मेल टुडे की  खबर के मुताबिक अब ये सभी माओवादी होने और नौकरी का दावा करेंगे।

आरोप है कि पहले इन युवाओं को हथियार समेत सीआरपीएफ ने सुनियोजित तरीके से आत्मसमर्पण कराया और कहा कि उन्हें नौकरी दी जाऐगी। कहा गया कि जेल में कुछ माह बिताने के बाद उन्हें सीआरपीएफ में नौकरी दी जाऐगी। लेकिन अब ये सभी पांच सौ चौदह असहाय और बेरागगार हैं। मामले में जनहित याचिका दायर कर सीबीआई जांच की मांग की गई है।
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मामले की हो सीबीआई जांच

करीब चार साल पहले हुए झारखंड के आत्मसमर्पण घोटाले में दो अज्ञात लोगों के खिलाफ चार्जसीट भी दाखिल की गई लेकिन तत्कालीन झारखंड सीएम  ने इस मामले में कुछ नहीं किया। वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव कुमार का कहना है कि इस मामले में झारखंड हाइकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर इस केस को सीबीआई को देने को कहा है।

कुमार का कहना है कि इस मामले पर सभी चुप्‍पी साधे हुए हैं। उनका कहना है कि इस मामले में पुलिस और सीआरपीएफ के अधिकारियों की भूमिका पर भी सवालों के घेरे में है।

पीड़ित झारखंड के गुमला जिले के कुलदीप बारा का कहना है कि उसके परिजनों ने एक लाख का कर्जा लिया है। उसने आठ माह जेल में बिताए। वहीं रेवारा गुमला जिले के करम टिग्गा का कहना है उसने रवि बोडरा को पचास हजार रूपए दिए और बोडरा द्वारा ‌दी गई राइफल के साथ आत्मसमर्पण किया। वह नौ माह तक जेल में रहा।
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ये है मामला

करीब चार साल पहले एक कोचिंग सेंटर के मालिक दिनेश प्रजापति ने पामेश प्रसाद 21 वर्ष से दो लाख लिए और उसके दोस्त रवि बोदरा से मिलवाया। बोडरा प्रसाद पर आरोप है कि वह युवाओं को आम्समर्पण नीति के तहत सीआरपीएफ में नौकरी का झांसा देता था।

करीब ऐसे ही पांच सौ चौदह लोगों को सरेंडर से पहले राइफल और पिस्टल दिए गए और सीआरीपीएफ के कोबरा कैंप में ले जाया गया। और कहा गया कि यह उनके लिए आत्मसमर्पण का छोटा सा तोहफा है। और इस दौरान समर्पण करने वालों की संख्या बढ़ती गई। करीब एक माह के बाद जब आईजी सीआरपीएफ एमवी राव ने पुलिस चीफ जीएस राठ को पत्र लिखा और रांची की पुरानी जेल में सीआरपीएफ कैंप में रह रहे उन पांच सौ चौदह लोगों के बारे में जानकारी मांगी।

इस मामले में जब सीआरपीएफ और पुलिस के अधिकारियों ने जानकारी मांगी तब यह मामला सामने आया। राव अभी हैदराबाद में तैनात हैं। वहीं इस मामले पर अतिरिक्त डीजीपी एसएन प्रधान का कहना है कि यह कोई आत्मसमर्पण घोटाला नहीं था। युवाओं को ईमानदारी के साथ मुख्यधारा से जोड़ना है।

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