एसपी ने बताया कि सुरक्षा बलों को निशाना बनाने के लिए लाल विद्रोहियों ने कई जगह आईईडी लगाए थे। यही अचानक से फट गया और सुरीन की मौत हो गई। कुछ मीडिया रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया कि सुरीन को पुलिस मुखबिर होने के संदेह में माओवादियों ने मार डाला था। इसे पुलिस ने सिरे से खारिज कर दिया।
उन्होंने बताया कि सूरिन खुद एक माओवादी समर्थक था। वह वनग्राम राजाबासा गांव में रहकर विद्रोहियों को साजो-सामान मुहैया कराने में शामिल था। आगे की जांच जारी है।