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झारखंड: जूनियर रेजिडेंट डॉक्टरों की सैलरी बढ़ी, अब हर महीने मिलेंगे 70 से 80 हजार रुपये; ₹17 हजार तक का फायदा

Thu, 22 Oct 2026 07:54 PM IST
तरुणेंद्र कुमार चतुर्वेदी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची

सार

झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार ने सरकारी मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में कार्यरत जूनियर रेजिडेंट (एकेडमिक) डॉक्टरों के मासिक मानदेय में बढ़ोतरी को मंजूरी दी है। नई दरों के तहत डॉक्टरों को हर महीने 15,500 से 17,000 रुपये तक अतिरिक्त मिलेंगे।
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सीएम हेमंत सोरेन। फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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झारखंड सरकार ने राज्य के सरकारी मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में कार्यरत जूनियर रेजिडेंट (एकेडमिक) डॉक्टरों को राहत देते हुए उनके मासिक मानदेय में बढ़ोतरी की है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने इसकी स्वीकृति दे दी है।
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नई दरों के लागू होने से डॉक्टरों को हर महीने 15,500 रुपये से लेकर 17,000 रुपये तक का अतिरिक्त लाभ होगा। सरकार का मानना है कि इस निर्णय से डॉक्टरों का मनोबल बढ़ेगा और सरकारी चिकित्सा संस्थानों में मरीजों को बेहतर इलाज और स्वास्थ्य सुविधाएं मिलेंगी।

संशोधित दरों से प्रतिमाह कितना मिलेगा लाभ
जूनियर रेजिडेंट डॉक्टरों की अलग-अलग श्रेणियों के लिए नई दरें निर्धारित की गई हैं। प्रथम वर्ष में कार्यरत डॉक्टरों का मानदेय 70,000 रुपये प्रतिमाह कर दिया गया है, जिससे उन्हें हर महीने 15,500 रुपये अतिरिक्त मिलेंगे। द्वितीय वर्ष के डॉक्टरों का मानदेय अब 75,000 रुपये प्रतिमाह होगा, जो पहले की तुलना में 16,500 रुपये अधिक है। तृतीय वर्ष के डॉक्टरों को अब 80,000 रुपये प्रतिमाह मिलेंगे, जिससे उनकी आय में 17,000 रुपये प्रतिमाह का इजाफा होगा। इस फैसले से मेडिकल कॉलेजों में तैनात डॉक्टरों को आर्थिक राहत मिलेगी।
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रिनपास के डीएनबी डॉक्टरों के लिए विभागीय पहल
सरकारी अस्पतालों के जूनियर रेजिडेंट डॉक्टरों के अलावा रांची के कांके स्थित रिनपास में कार्यरत डीएनबी प्रशिक्षणार्थियों के मानदेय पुनरीक्षण को लेकर भी प्रक्रिया शुरू की गई है। स्वास्थ्य विभाग ने रिनपास के ब्रॉड स्पेशियलिटी और पोस्ट-डिप्लोमा डीएनबी डॉक्टरों के लिए न्यूनतम मानदेय दरें तय करने का प्रस्ताव तैयार किया है।

विभागीय प्रस्ताव के अनुसार ब्रॉड स्पेशियलिटी डीएनबी प्रशिक्षणार्थियों के लिए प्रथम वर्ष में 43,000 रुपये, द्वितीय वर्ष में 45,000 रुपये और तृतीय वर्ष में 47,000 रुपये प्रतिमाह मानदेय की सिफारिश की गई है। वहीं पोस्ट-डिप्लोमा डीएनबी डॉक्टरों के लिए प्रथम वर्ष में 45,000 रुपये और द्वितीय वर्ष में 47,000 रुपये प्रतिमाह देने का प्रावधान है। हालांकि विभागीय अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि मानदेय पुनरीक्षण के प्रस्ताव पर कार्रवाई होने का अर्थ यह नहीं है कि नई दरों से भुगतान शुरू हो गया है।

स्वास्थ्य तंत्र में सुधार मकसद
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने कहा कि डॉक्टरों के मान-सम्मान में किसी तरह की कटौती नहीं की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार का मकसद केवल मानदेय बढ़ाना नहीं, बल्कि स्वास्थ्य तंत्र में सुधार करना है। मंत्री के अनुसार डॉक्टर दिन-रात मरीजों की सेवा करते हैं, इसलिए उन्हें उचित सम्मान, प्रोत्साहन एवं बेहतर कार्य-परिस्थितियां उपलब्ध कराना जरूरी है। सरकार अस्पतालों में आधुनिक उपकरणों की उपलब्धता बढ़ाने, विशेषज्ञ डॉक्टरों को प्रोत्साहित करने और मरीजों को बेहतर उपचार देने की दिशा में काम कर रही है।

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स्वास्थ्य सेवाएं मजबूत होने की उम्मीद
स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने बताया कि स्वास्थ्य मंत्री के निर्देश पर संबंधित फाइल को स्वीकृति प्रदान कर दी गई है। उन्होंने कहा कि सरकार डॉक्टरों का मनोबल बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। इसके साथ ही रिनपास में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए जांच, उपचार और आपातकालीन सेवाओं में सुधार का लक्ष्य रखा गया है। सरकार को उम्मीद है कि इस कदम से डॉक्टरों का उत्साह बढ़ेगा और राज्य में स्वास्थ्य सेवाएं मजबूत होंगी।
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