झारखंड हाईकोर्ट ने रांची के कांटाटोली स्थित विवादित जमीन से जुड़े 12 साल पुराने मामले में अहम फैसला सुनाते हुए शबाना खातून की याचिका खारिज कर दी। अदालत ने स्पष्ट किया कि जिस जमीन के स्वामित्व को लेकर कानूनी विवाद चल रहा है और जहां पब्लिक उर्दू मिडिल स्कूल के संचालन का दावा है, वहां स्कूल पक्ष को मुकदमे से बाहर नहीं रखा जा सकता। न्यायमूर्ति संजय कुमार द्विवेदी की अदालत ने को यह आदेश पारित करते हुए निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा।
याचिकाकर्ता ने किया था विरोध
यह मामला वर्ष 2014 में दायर याचिका से जुड़ा है। याचिकाकर्ता शबाना खातून ने निचली अदालत के 24 फरवरी, 2014 के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें पब्लिक उर्दू मिडिल स्कूल, कांटाटोली के अध्यक्ष मोहम्मद साबिर को टाइटल सूट में हस्तक्षेपकर्ता के रूप में शामिल करने की अनुमति दी गई थी। याचिकाकर्ता ने तर्क दिया था कि विवादित संपत्ति पर स्कूल के अध्यक्ष का कोई अधिकार नहीं है, इसलिए उन्हें पक्षकार नहीं बनाया जाना चाहिए।
याचिकाकर्ता के अनुसार उन्होंने वर्ष 1995 में पंजीकृत बिक्री विलेख से यह भूमि खरीदी थी। इस जमीन का म्यूटेशन उनके नाम पर हुआ है और वे नियमित रूप से लगान व नगर निगम कर का भुगतान करती रही हैं। उन्होंने बताया कि इस संपत्ति का स्वामित्व पहले अन्य व्यक्तियों के पास था और विधिवत खरीद-बिक्री के बाद यह जमीन उनके हिस्से में आई थी।
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नगर निगम ने किया जमीन पर दावा
सुनवाई के दौरान रांची नगर निगम की ओर से पेश दस्तावेज में दावा किया गया कि प्लॉट निगम की संपत्ति है। निगम के रिकॉर्ड में ऐसे पत्र पेश किए, जिनमें संबंधित होल्डिंग रद्द करने, म्यूटेशन निरस्त करने और निर्माण रोकने का उल्लेख था। एक अन्य दस्तावेज में पाया गया कि इसी प्लॉट पर पब्लिक उर्दू स्कूल संचालित है और यह भूमि नगर निगम के अधिकार क्षेत्र में आती है।
विवादित प्लॉट को लेकर दो अलग-अलग दावे
झारखंड हाईकोर्ट ने माना कि प्रथम दृष्टया रिकॉर्ड से स्पष्ट होता है कि विवादित प्लॉट को लेकर दो अलग-अलग दावे मौजूद हैं। एक पक्ष जमीन पर निजी स्वामित्व का दावा कर रहा है, जबकि दूसरा पक्ष उसी प्लॉट के हिस्से पर स्कूल चलने की बात कह रहा है। अदालत ने कहा कि ऐसी स्थिति में विवाद का प्रभावी और पूर्ण निपटारा करने के लिए मुकदमे में स्कूल पक्ष की उपस्थिति आवश्यक है। अदालत ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के विदुर इम्पेक्स एंड ट्रेडर्स बनाम तोश अपार्टमेंट्स फैसले का संदर्भ दिया। अदालत ने कहा कि जिस व्यक्ति या संस्था की उपस्थिति से विवाद का समग्र समाधान संभव हो, उसे उचित पक्षकार बनाया जा सकता है। हाईकोर्ट ने माना कि निचली अदालत ने हस्तक्षेप याचिका स्वीकार करके कोई कानूनी त्रुटि नहीं की।
निचली अदालत करेगी अंतिम फैसला
अदालत ने स्पष्ट किया कि विवादित जमीन का कौन सा हिस्सा किसके कब्जे में है और स्कूल वास्तव में किस स्थान पर चल रहा है, इसका अंतिम निर्णय साक्ष्यों के आधार पर लंबित टाइटल सूट में होगा। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने याचिका निरस्त करते हुए पूर्व में दिया अंतरिम आदेश समाप्त कर दिया। अदालत ने सभी पक्षों को निचली अदालत में उपस्थित होकर मुकदमे की आगे की सुनवाई में भाग लेने की स्वतंत्रता दे दी।