मीडिया को संबोधित करते हुए आईएमए की झारखंड इकाई के अध्यक्ष अरुण कुमार सिंह ने कहा कि उनकी मांगें अभी भी राज्य सरकार के पास लंबित हैं। उन्होंने कहा, 'हमें सिर्फ आश्वासन दिया गया है लेकिन अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। सरकार ने लंबे समय से लंबित हमारी मांगों के प्रति उदासीन रवैया अपनाया है, जो स्वीकार्य नहीं है।'
अरुण कुमार सिंह ने कहा कि जब उन्होंने कई दौर के आंदोलनों के साथ दबाव बनाया, तो राज्य सरकार बजट सत्र के दौरान राज्य विधानसभा में एमपीए विधेयक लाई। उन्होंने कहा, 'कुछ विधायकों की आपत्ति के बाद इसे प्रवर समिति के पास भेजा गया और यह करीब पांच महीने से लंबित है।'
आईएमए की झारखंड इकाई के सचिव प्रदीप कुमार ने कहा, 'हमने क्लीनिकल एस्टैब्लिशमेंट एक्ट के एक नियम में संशोधन की मांग की है। इसे विधानसभा से पारित किए बिना संशोधित किया जा सकता है लेकिन सरकार अनजान है।'
कुमार ने कहा कि उन्होंने एकल डॉक्टरों के क्लीनिक, दंपति डॉक्टरों के क्लीनिक और 50 बेड से कम के अस्पतालों को सीईए के दायरे से बाहर रखने की मांग की है। उन्होंने कहा,'अगर संशोधन तुरंत नहीं किया जाता है, तो एकल डॉक्टर क्लीनिक, दंपति डॉक्टरों के क्लीनिक और 50 बेड से नीचे के अस्पताल अपने प्रतिष्ठान बंद करने के लिए मजबूर होंगे।
झारखंड आईएमए के अध्यक्ष ने कहा, 'अगर सरकार कोई कदम नहीं उठाती है, तो हमारे पास फिर से अपना आंदोलन शुरू करने के अलावा कोई विकल्प नहीं होगा, जो मरीजों को परेशानी में डाल सकता है जो हम नहीं चाहते हैं।'