जनहित याचिका में यह आरोप लगाया गया था कि एक समुदाय के सदस्यों को प्रार्थना के लिए एक कमरा आवंटित करना मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। धर्म के समान अधिकार का उल्लंघन किया गया है।
झारखंड उच्च न्यायालय ने मंगलवार को राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह बताए कि किस परिस्थिति में झारखंड विधानसभा में नमाज अदा करने के लिए कमरा आवंटित किया गया।
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एक जनहित याचिका (पीआईएल) पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश संजय कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति आनंद सेन की खंडपीठ ने सरकार से मामले में हलफनामा दाखिल करने को कहा। कोर्ट ने कहा कि मामले की अगली सुनवाई 18 मई को होगी।
जनहित याचिका में यह आरोप लगाया गया था कि एक समुदाय के सदस्यों को प्रार्थना के लिए एक कमरा आवंटित करना मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। धर्म के समान अधिकार का उल्लंघन किया गया है, यह आरोप लगाया गया था।
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कमरा टीडब्लयू 348 को सितंबर 2021 में नमाज अदा करने के लिए आवंटित किया गया था, जिसके कारण विपक्षी भाजपा ने विरोध किया, जिसने विधानसभा परिसर में एक हनुमान मंदिर की मांग की।