सोरेन सरकार को गिराने की साजिश
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झारखंड हाईकोर्ट ने सरकार के उस अनुरोध को खारिज कर दिया है जिसमें मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के खिलाफ जनहित याचिकाओं पर सुनवाई को स्थगित करने का अनुरोध किया गया था। झारखंड के महाधिकवक्ता ने स्थगन की मांग लेकर याचिका दायर की थी।
हाईकोर्ट में दो जनहित याचिकाओं पर कल 17 जून को सुनवाई होनी है। इनमें एक याचिका शेल कंपनियों से जुड़ी है जबकि दूसरी याचिका मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा खनन पट्टों का कथित लाभ लेने को लेकर है। एडवोकेट जनरल राजीव रंजन ने हाईकोर्ट को सूचित किया कि वह और सीनियर एडवोटकेट कपिल सिब्बल कोविड पॉजिटिव निकले हैं, इसलिए उनके लिए सुनवाई में शामिल होना मुश्किल होगा।
मुख्यमंत्री सोरेने के परिवार के सदस्यों और उनसे जुड़े लोगों के खिलाफ जनहित याचिका में संचालित शेल कंपनियों के जरिए फर्जी लेन-देन का आरोप लगाया गया है। इससे पहले झारखंड हाईकोर्ट ने 3 जून को अपने आदेश में कहा था कि यह स्थापित सत्य है कि याचिकाएं सिर्फ इस वजह से रद्द नहीं की जा सकती हैं कि वह सुनवाई के योग्य नहीं हैं। याचिका में हेमंत सोरेन, उनके भाई बसंत सोरेन और अन्य करीबियों द्वारा शेल कंपनियों में निवेश करने और उसके जरिए अन्य जगहों पर होटल, मॉल सहित अन्य संपत्ति अर्जित करने का गंभीर आरोप लगाया गया है।
रांची हिंसा मामले की सुनवाई 17 को
झारखंड उच्च न्यायालय रांची हिंसा मामले में NIA जांच की मांग वाली जनहित याचिका पर 17 जून को सुनवाई करेगा। कोर्ट ने राजधानी रांची में 10 जून को हुई हिंसा और उपद्रव की घटना को लेकर दायर जनहित याचिका पर सोरेन सरकार से 17 जून तक जवाब मांगा है। याचिका में पूरे मामले की जांच एनआईए से कराने की मांग की गई है।