झारखंड के रांची शहर में पूनम देवी जगन्नाथ मंदिर के पास लगे 300 साल पुराने एक मेले में भटक रही है।
पूनम अपनी उस बेटी को तलाशने की कोशिश कर रही है जिसे बिना बताए कुछ लोगों ने दिल्ली में बेच दिया। थकी हुई मां एक आदमी का पीछा करती है और कुछ देर बाद वह मेले की भीड़ में गुम हो जाता है।
उसे उम्मीद है कि वह आदमी इस मेले में मिल सकता है जो उसकी 14 साल की बेटी को दिल्ली ले गया था।
पुलिस भी जानती है मेलों का सच
अपनी 7 बेटियों को अकेली पाल रही विधवा पूनम मजदूरी करती है। वह 300 साल इस पुराने मेले में आई है और एक तस्कर को खोज रही है। उसे उम्मीद है कि उस आदमी के जरिए उसकी बेटी वापस मिल सकती है।
इस मेले में कई बार आदिवासी लड़कियों को शादी या अच्छे काम और पैसे का लालच देकर दिल्ली या अन्य राज्यों में बेच दिया जाता है।
स्थानीय पुलिस भी इस बात को मानती है कि इस तरह के मेलों और हाट बाजारों के बाद लड़कियों की तस्करी के मामले बहुत ज्यादा बढ़ जाते हैं।
बेटा-बेटी दोनों खोए
सिर्फ लड़कियां ही नहीं ऐसी जगहों से काम के लिए भेजे गए लड़के भी सुरक्षित नहीं है।
पूनम की बेटी के अलावा एक बेटे को भी दिल्ली भेजा गया था। जब पूनम ने अपने बेटे से बात की तो उसे पता चला कि वहां काम करने का माहौल और व्यवस्थाएं बहुत ही बुरी हैं।
ये सारी बातें पता चलने के बाद मां अपने बेटे को लेने दिल्ली पहुंची। लेकिन इससे पहले कि कुछ भी ठीक हो पाता, पूनम की बेटी गायब हो चुकी थी।
नौकरी के नाम पर वेश्यावृत्ति
स्थानीय लोगों में ज्यादातर को इस बात की जानकारी है कि इस तरह के मेलो में लड़कियों की तस्करी का काम किया जाता है।
इसीलिए पूनम भी यहां अपनी बेटी के लिए उस तस्कर को खोज रही है। पूनम चाहती है कि झारखंड पुलिस बेटी को बेचने वाले तस्कर को गिरफ्तार कर उसे गंभीर सजा दे।
राज्य में काम कर रहे एनजीओ के आंकड़ों में मुताबिक झारखंड से तस्करी की गई 98% लड़कियों को दिल्ली, मुम्बई और गोवा भेज दिया जाता है।
ज्यादातर मामलों में घरेलू कामकाज के नाम पर लड़कियों को दूसरे राज्य में भेजा जाता है जहां से उन्हें बाद में वेश्यावृत्ति में धकेल दिया जाता है।