बयान में कहा गया है कि राज्यपाल ने राज्य सरकार से विधेयक की वैधता की समीक्षा करने को कहा है और कहा है कि यह संविधान और उच्चतम न्यायालय के आदेशों एवं निर्देशों के अनुरूप होना चाहिए।
राज्यपाल रमेश बैस ने रविवार को एक विधेयक राज्य सरकार को समीक्षा के लिए लौटा दिया। इसमें लोगों की अधिवास स्थिति निर्धारित करने के लिए 1932 के भूमि रिकॉर्ड का इस्तेमाल करने का प्रस्ताव है।
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बयान में कहा गया है कि राज्यपाल ने राज्य सरकार से विधेयक की वैधता की समीक्षा करने को कहा है और कहा है कि यह संविधान और उच्चतम न्यायालय के आदेशों एवं निर्देशों के अनुरूप होना चाहिए।
झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के नेतृत्व वाली सरकार ने राज्यपाल से विधेयक पर अपनी सहमति देने और इसे राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजने का आग्रह किया था। विधेयक के अनुसार, जिन लोगों के पूर्वज 1932 से पहले राज्य में रह रहे थे और जिनके नाम उस वर्ष के भूमि रिकॉर्ड में शामिल थे, उन्हें झारखंड का स्थानीय निवासी माना जाएगा।