बिहार के बहुचर्चित चारा घोटाला मामले में सीबीआई स्पेशल कोर्ट ने झारखंड के पूर्व मुख्य सचिव और तत्कालीन जिला उपायुक्त सजल चक्रवर्ती को पांच साल सश्रम जेल की सजा सुनाई है। कारावास की सजा के साथ ही चार लाख रुपये जुर्माना भी लगाया गया है। जुर्माना नहीं अदा करने पर एक साल जेल की सजा बढ़ जाएगी। बचाव पक्ष के वकील ने चक्रवर्ती के खराब स्वास्थ्य को देखते हुए उन्हें कम से कम सजा देने की अपील की। वहीं अभियोजन पक्ष के वकील ने आईएएस अधिकारी सजल चक्रवर्ती के भ्रष्टाचार के बड़े मामले में शामिल होने के कारण उन्हें कड़ी सजा दिए जाने की मांग की।
रांची में सीबीआई की विशेष अदालत के जज शंभूलाल साहू ने चक्रवर्ती को कांड संख्या 68(A)/96 में 14 नवंबर को दोषी करार दिया और फैसला सुरक्षित रख लिया था। सजा पर फैसले का दिन 21 नवंबर मुकर्रर किया गया था लेकिन कोर्ट की कार्यवाही स्थगित हो जाने की वजह से चक्रवर्ती को सजा एक दिन बाद सुनाई जा सकी।
बिहार का पशुपालन घोटाला चारा घोटाला के नाम से चर्चित हुआ। यह घोटाला बिहार सरकार के खजाने से गलत ढंग से पैसे निकालने का है। पशुपालन विभाग के अधिकारियों और ठेकेदारों ने राजनीतिक मिलीभगत से कई सालों के दौरान करोड़ों रुपये निकाले।
चाईबासा के तत्कालीन उपायुक्त सजल चक्रवर्ती पर आरोप था कि सरकारी खजाने से अवैध तरीके से 33.70 करोड़ रुपये निकाले जाने की जानकारी होने के बावजूद उन्होंने दोषियों पर कार्रवाई नहीं की। चारा घोटाला के आरोपियों से रिश्वत लेने के मामले में विशेष सीबीआई कोर्ट ने उन्हें दोषी करार दिया और सजा सुनाई है।
इस मामले में पूरक अभिलेख की सुनवाई चल रही थी। इस मामले में चक्रवर्ती अकेले आरोपी थे। बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद और डॉ. जगन्नाथ मिश्र समेत अन्य आरोपियों को साल 2013 में दोषी करार देते हुए सजा सुनाई जा चुकी है।
हाईकोर्ट ने सजल चक्रवर्ती को इस मामले में बरी कर दिया था। सीबीआई ने हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी। जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने केस में फिर से सुनवाई करने के आदेश दिए। सीबीआई स्पेशल कोर्ट ने चक्रवर्ती को चारा घोटाला मामले में दोषी करार दिए जाने के बाद जेल भेजा दिया था। लेकिन हाईकोर्ट से राहत मिलने के बाद सजल चक्रवर्ती जमानत पर बाहर थे।