वित्त मंत्री चिंदबरम की मानी जाए तो केंद्र सरकार अगले छह महीने में झारखंड में विधानसभा चुनाव करा सकती है। वित्त मंत्री इस बात को लोकसभा में कह भी चुके हैं। यह बात उन्होंने लोकसभा में झारखंड के 2013-14 के लिए बजट पर हुई चर्चा के जवाब में कही।
इस मसले पर गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे भी कह चुके हैं कि सरकार का झारखंड में राष्ट्रपति शासन की अवधि बढ़ाने का कोई इरादा नहीं है। सरकार चुनाव कराने के लिए प्रयासरत है और हमारा इरादा छह महीने के अंदर राज्य में चुनाव कराने का है।
इससे पहले राष्ट्रपति शासन के दौरान झारखंड में कामकाज कैसे हो, इस पर विचार के लिए प्रदेश से आने वाले सांसदों की 23 मार्च को बैठक होगी। बैठक में प्रदेश के राज्यपाल और आला अधिकारी शामिल होंगे।
वित्त मंत्री चिदंबरम ने सदन में कहा कि झारखंड अत्यंत धनी राज्य है लेकिन यह भी सच है कि यहां पर सबसे ज्यादा गरीब आबादी है और सबसे खराब राजनीतिक व्यवस्था रही है। यह स्वीकार करने में कोई शर्म नहीं है कि हमने अपनी ओर से सर्वश्रेष्ठ कोशिश की लेकिन सभी संस्थाएं ढह गई हैं।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति शासन के जरिए राज्य का विकास नहीं हो सकता। जनता द्वारा चुनी गई और जनता के प्रति समर्पित सरकार ही राज्य में विकास को संभव बना सकती है।
चिदंबरम के जवाब के बाद सदन ने झारखंड के बजट के संबंध में 2013-14 के लिए अनुदान मांगों, 2012-13 के लिए अनुदान की अनुपूरक मांगों को ध्वनिमत से मंजूरी कर लिया।
इससे पहले बजट पर चर्चा में भाग लेते हुए भाजपा के निशिकांत दुबे ने केंद्र सरकार पर झारखंड की अनेक योजनाओं की राशि में कटौती करने का आरोप भी लगाया।