झारखंड के पुलिस महानिदेशक की नियुक्ति से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब, उत्तर प्रदेश और झारखंड की नियुक्ति नियमावली पर न्याय मित्र से समेकित रिपोर्ट मांगी है। केंद्र सरकार को भी तीनों राज्यों के नियमों पर अपनी राय देने का निर्देश दिया गया है। मामले की अगली सुनवाई 23 नवंबर को होगी।
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सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड के पुलिस महानिदेशक की नियुक्ति से जुड़े मामले में पंजाब, उत्तर प्रदेश और झारखंड की नियुक्ति नियमावली पर न्याय मित्र से समेकित रिपोर्ट मांगी है। शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार को भी इन तीनों राज्यों की पुलिस महानिदेशक नियुक्ति नियमावली पर अपनी राय देने के निर्देश दिए हैं। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी की याचिका पर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायाधीश जायमाल्या बागची और न्यायाधीश वी मोहना की पीठ ने मंगलवार को यह सुनवाई की। मामले की अगली सुनवाई 23 नवंबर को होगी।
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नियमावली पर कोर्ट के निर्देश
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय पिछली सुनवाई में कह चुका है कि झारखंड सरकार की नियमावली सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुरूप नहीं है। वहीं न्याय मित्र राजू रामचंद्रन ने अदालत को सूचित किया कि वे झारखंड के मुद्दे पर अपनी राय दे चुके हैं और अन्य राज्यों द्वारा बनाई गई नियमावली पर भी राय तैयार कर चुके हैं, जिसे वे कोर्ट में पेश करेंगे। झारखंड सरकार की ओर से कपिल सिब्बल ने नियमावली पर नए सिरे से शपथ पत्र दायर न किए जाने की बात कही। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उत्तर प्रदेश और पंजाब में भी नियमावली बनी है, ऐसे में न्याय मित्र तीनों राज्यों की नियमावली पर अपनी समेकित राय दें।
तदाशा मिश्रा की नियुक्ति पर रिपोर्ट
न्याय मित्र ने पूर्व में सौंपी रिपोर्ट में सर्वोच्च अदालत को बताया है कि झारखंड में सेवानिवृत्ति के एक दिन पूर्व तदाशा मिश्रा को पुलिस महानिदेशक बनाना प्रकाश सिंह बनाम भारत सरकार के मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के अनुरूप नहीं है। शीर्ष अदालत इस मामले में अब 23 नवंबर को आगे की सुनवाई करेगी।