झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन
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झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन रविवार को अपने पूरे परिवार के साथ रजरप्पा मंदिर पहुंचे और पारंपरिक विधि-विधान तथा संथाली परंपराओं के अनुसार अपने पिता एवं झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के संस्थापक संरक्षक, दिवंगत दिशोम गुरु शिबू सोरेन की अस्थियां दामोदर नदी में विसर्जित कीं। इस अवसर पर उनके छोटे भाई और झामुमो विधायक बसंत सोरेन, मुख्यमंत्री के बेटे, अन्य परिजन और परिवार के करीबी सदस्य भी उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भावपूर्ण श्रद्धा के साथ अस्थि विसर्जन किया और परिवार की ओर से अन्य धार्मिक परंपराओं का पालन भी किया। इस दौरान दामोदर तट पर श्रद्धालुओं ने गुरुजी के सम्मान में श्रद्धासुमन अर्पित किए। पूरे माहौल में श्रद्धा, भावुकता और गुरुजी की यादें गूंजती रहीं।
रविवार सुबह मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन परिवार सहित अपने पैतृक गांव नेमरा से रजरप्पा के लिए रवाना हुए थे। इसके एक दिन पहले शनिवार को नेमरा गांव में संस्कार भोज का आयोजन किया गया था, जिसमें लाखों लोग शामिल हुए और दिवंगत शिबू सोरेन को अंतिम श्रद्धांजलि दी। संस्कार भोज में राजनीतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक क्षेत्रों से बड़ी संख्या में हस्तियां भी मौजूद रहीं।
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पूर्व शिक्षा मंत्री बैद्यनाथ राम और लातेहार झामुमो जिला अध्यक्ष मोतीनाथ शहदेव ने संस्कार भोज में हिस्सा लिया। उन्होंने सीएम हेमंत सोरेन से मुलाकात कर गुरुजी से जुड़ी यादें साझा कीं। जिला अध्यक्ष मोतीनाथ शहदेव ने बताया कि दिशोम गुरु शिबू सोरेन जब लातेहार आए थे, तो कैसे कार्यकर्ताओं और लोगों ने कार्यक्रम की तैयारी की थी, इसे साझा किया। वहीं पूर्व मंत्री बैद्यनाथ राम ने बताया कि संस्कार भोज में झारखंड, बंगाल, उड़ीसा, छत्तीसगढ़ सहित कई राज्यों से लगभग पांच लाख लोग पहुंचे। इस दौरान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी भावुक हो गए और कहा कि गुरुजी ने उन्हें बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। उन्होंने आदिवासियों, गरीबों और पिछड़ों के लिए किए गए गुरुजी के संघर्ष और उनके विचारों को आगे बढ़ाने का संकल्प जताया।