खदान लीज मामले में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने आज चुनाव आयोग को अपना जवाब भेज दिया है। हेमंत सोरेन पर पद पर रहते हुए लाभ लेने का आरोप है। बता दें कि पूर्व सीएम रघुवर दास ने 10 फरवरी को इस मामले को उठाया था। उन्होंने सीएम पर पद का दुरुपयोग करते हुए रांची के अनगड़ा में अपने नाम से पत्थर खदान आवंटित करने का आरोप लगाया था। इसके बाद 11 फरवरी को रघुवर दास और बाबूलाल मरांडी के नेतृत्व में भाजपा के प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल से शिकायत की थी कि और कहा था कि पूरा मामला ऑफिस ऑफ प्रॉफिट के दायरे में आता है। इसलिए मुख्यमंत्री की विधानसभा सदस्यता रद्द कर दी जानी चाहिए।
जवाब देने की आज आखिरी तारीख थी
गौरतलब है कि 2 मई को चुनाव आयोग ने सीएम सोरेन को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा था कि पद पर रहते हुए लाभ लेने के आरोप में उनकी सदस्यता रद्द क्यों न की जाए? बाद में सीएम ने मां के खराब स्वास्थ्य खराब होने का हवाला देते हुए जवाब देने के लिए 4 हफ्ते का समय मांगा। इस पर चुनाव आयोग ने इसके लिए 10 दिन का समय दिया था। जवाब देने की आज आखिरी तारीख थी।
क्या है मामला?
झारखंड में खदान और उद्योग विभाग दोनों सीएम सोरेन के पास है। पहले से ही रांची में उनके नाम पर पत्थर की खदान के कथित आवंटन के कारण कानूनी उलझन में हैं। 2019 में बरहेट निर्वाचन क्षेत्र से सदन के लिए चुने गए सोरेन ने 13 साल पहले रांची जिले के अंगारा ब्लॉक के प्लाट संख्या 482 पर 0.88 एकड़ के पत्थर के खनन पट्टे के लिए आवेदन किया था। वहीं, चुनाव आयोग पहले से मामले की जांच कर रहा है कि क्या मुख्यमंत्री ने अपने पद का इस्तेमाल लाभ के लिए किया है? अगर सोरेन मामले में दोषी पाए जाने पर विधानसभा सदस्यता से अयोग्यता की नौबत भी आ सकती है।