फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Jharkhand News: विधानसभा मानसून सत्र में पांच विधेयक पारित, अब कुलपति की नियुक्ति का अधिकार सीएम को

Tue, 26 Aug 2025 08:08 PM IST
शबाहत हुसैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची

सार

Bihar: झारखंड राज्य विश्वविद्यालय विधेयक 2025 के तहत अब विश्वविद्यालयों में कुलपति, प्रति कुलपति, परीक्षा नियंत्रक और वित्तीय सलाहकार की नियुक्ति का अधिकार राज्यपाल के पास नहीं रहेगा। यह अधिकार अब मुख्यमंत्री को होगा। इसके लिए एक चयन समिति बनाई जाएगी।
विज्ञापन
झारखंड विधानसभा - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

झारखंड विधानसभा के मानसून सत्र में मंगलवार को राज्य सरकार ने पांच अहम विधेयक पारित किए। इनमें झारखंड राज्य विश्वविद्यालय विधेयक 2025, झारखंड कोचिंग संस्थान नियंत्रण एवं विनियमन विधेयक 2025, झारखंड व्यावसायिक शिक्षण संस्थान शुल्क विनियमन विधेयक 2025, झारखंड सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विशेष छूट विधेयक 2025 और झारखंड प्लेटफॉर्म आधारित गिग श्रमिक निबंधन एवं कल्याण विधेयक 2025 शामिल हैं।

सबसे चर्चित झारखंड राज्य विश्वविद्यालय विधेयक 2025 के तहत अब विश्वविद्यालयों में कुलपति, प्रति कुलपति, परीक्षा नियंत्रक और वित्तीय सलाहकार की नियुक्ति का अधिकार राज्यपाल के पास नहीं रहेगा। यह अधिकार अब मुख्यमंत्री को होगा। इसके लिए एक चयन समिति बनाई जाएगी, जिसमें शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, यूजीसी का प्रतिनिधि और अन्य विशेषज्ञ शामिल होंगे।

व्यावसायिक शिक्षण संस्थान शुल्क विनियमन विधेयक के तहत निजी कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में मेडिकल, इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट जैसे कोर्स की फीस तय करने के लिए शुल्क नियामक समिति का गठन होगा। इसका मकसद फीस को तार्किक और समान बनाना है।

विज्ञापन


पढ़ें: सेवानिवृत्त न्यायाधीश नवीन कुमार बिजली विनियामक आयोग के नए अध्यक्ष बने, राज्यपाल ने दिलाई शपथ

कोचिंग संस्थान नियंत्रण विधेयक के तहत 50 से अधिक छात्रों को पढ़ाने वाले सभी कोचिंग सेंटर को रजिस्ट्रेशन कराना होगा। वहीं, 1000 से ज्यादा छात्रों वाले संस्थानों को एक मनोवैज्ञानिक रखना अनिवार्य होगा। सरकार का कहना है कि इससे कोचिंग सेंटरों में बढ़ती अव्यवस्था और मनमानी फीस पर रोक लगेगी।

एमएसएमई विशेष छूट विधेयक के लागू होने के बाद राज्य में नए छोटे और मझोले उद्योग लगाने वालों को तीन साल तक लाइसेंस लेने या टैक्स देने की जरूरत नहीं होगी। उद्योगपतियों को इस दौरान सिर्फ प्लांट लगाने और कारोबार बढ़ाने पर ध्यान देना होगा। गिग श्रमिक निबंधन और कल्याण विधेयक का मकसद ऐप आधारित काम करने वाले श्रमिकों जैसे डिलीवरी बॉय और कैब ड्राइवरों को पंजीकृत कर उन्हें बीमा और अन्य कल्याणकारी योजनाओं का लाभ देना है।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें