एनएचआरसी के दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए जून के अंतिम सप्ताह में मामले को सीआईडी को स्थानांतरित कर दिया गया था। सीआईडी की तीन सदस्यीय टीम ने मामले की जांच की। अंचल अधिकारी की शिकायत पर 22 नामजद व करीब 8-10 हजार अज्ञात के खिलाफ डेली मार्केट थाने में 17/22 मामला दर्ज किया गया था।
झारखंड की राजधानी रांची में 10 जून को हुई हिंसा के दौरान पुलिस फायरिंग के मामले में झारखंड सीआईडी ने 11 नामजद आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। यह मामला डेली मार्केट पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया था। इस मामले में विभिन्न थानों में 48 मामले दर्ज किए गए हैं, जिसमें से एक की जांच सीआईडी द्वारा की जा रही है। बाकी 47 मामलों की जांच एसआईटी कर रही है।
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एनएचआरसी के दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए जून के अंतिम सप्ताह में मामले को सीआईडी को स्थानांतरित कर दिया गया था। सीआईडी की तीन सदस्यीय टीम ने मामले की जांच की। अंचल अधिकारी की शिकायत पर 22 नामजद व करीब 8-10 हजार अज्ञात के खिलाफ डेली मार्केट थाने में 17/22 मामला दर्ज किया गया था। इससे पहले 22 जून को हुई रांची हिंसा के संबंध में एक प्राथमिकी दर्ज की गई थी, जिसमें बताया गया था कि कैसे भीड़ हिंसक हो गई और बदमाशों ने पुलिस पर गोलियां चला दीं।
एफआईआर के मुताबिक, बदमाशों ने 60 से 80 राउंड फायरिंग की और रांची के मेन रोड स्थित हनुमान मंदिर पर चढ़ने का प्रयास किया। विशेष प्राथमिकी अंचल अधिकारी (सीओ) अमित भगत ने दर्ज कराई है। उन्होंने कहा कि जब हजारों लोगों ने पैगंबर मुहम्मद के खिलाफ नूपुर शर्मा की आपत्तिजनक टिप्पणी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया जा रहा था उस समय वह गश्त कर रहे थे।प्राथमिकी में कहा गया है कि विरोध मार्च बिना अनुमति के की गई थी।
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पुलिस ने भीड़ को रोकने का प्रयास किया लेकिन वह हिंसक हो गई। प्राथमिकी में कहा गया है कि "सुनियोजित तरीके से, उपद्रवी धार्मिक दंगे भड़काने और पथराव जारी रखने के लिए हनुमान मंदिर को निशाना बनाना चाहते थे। इस प्रक्रिया में भीड़ और बदमाशों ने पुलिस पर गोलियां चलाईं...भीड़ में कई लोगों ने पुलिसकर्मियों के हथियार भी छीनने की कोशिश की।"
प्राथमिकी में आगे बताया गया है कि पुलिस द्वारा मामूली बल का प्रयोग किया गया, लेकिन इसने भीड़ को नहीं रोका। उपायुक्त और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक द्वारा भी प्रदर्शनकारियों से बात करने और उन्हें शांत करने के प्रयासों का कोई नतीजा नहीं निकला। प्राथमिकी में उल्लेख किया गया है कि इसके चलते नियंत्रित हवाई फायरिंग और बल प्रयोग का आदेश दिया गया, जो कुछ हद तक भीड़ को तितर-बितर करने में सफल रहा। पांच राउंड आंसू गैस के गोले दागे गए और कई राउंड हवाई फायरिंग की गई और फिर लाठीचार्ज किया गया... जिसके बाद भीड़ को नियंत्रित किया गया"