सहायक आचार्य नियुक्ति मामले में सुप्रीम कोर्ट अब 4 नवंबर को सुनवाई करेगा। यह सुनवाई संशोधित परिणाम जारी न करने पर दाखिल अवमानना याचिका पर होगी। झारखंड सरकार की ओर से आदेश के अनुपालन के लिए अतिरिक्त समय देने की मांग करते हुए आवेदन दायर किया गया है। हालांकि, यह आवेदन कोर्ट के रिकॉर्ड पर उपलब्ध नहीं होने के कारण अदालत ने अगली सुनवाई 4 नवंबर को तय की है।
उच्चतम न्यायालय का निर्देश
जस्टिस उज्जल भुइयां और न्यायमूर्ति अतुल एस चंदुरकर की पीठ में मामले की सुनवाई हुई। पीठ ने अपने 17 सितंबर के आदेश का हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि प्रशासनिक निर्देश से अधिक मेधावी आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को सामान्य वर्ग में जाने से नहीं रोका जा सकता। अदालत ने 19 मई के आदेश में स्पष्ट किया था कि सभी श्रेणियों में पद उपलब्ध हैं, इसलिए रिक्तियों की कमी का मुद्दा प्रासंगिक नहीं है।
शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार को 19 जनवरी, 2025 के निर्णय को चार सप्ताह के भीतर लागू करने का निर्देश दिया है। अनुपालन न होने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अवमानना कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। अदालत ने मुख्य सचिव को छह सप्ताह के भीतर अनुपालन शपथ पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया था। राज्य के अधिवक्ता राजीव शंकर द्विवेदी ने आवेदन दायर होने की जानकारी दी।
बीआईटी मेसरा की रिपोर्ट
दूसरी तरफ, झारखंड हाईकोर्ट के जस्टिस दीपक रोशन की अदालत में सहायक आचार्य नियुक्ति में लागू नार्मलाइजेशन नियम को चुनौती देने वाली 103 याचिकाओं पर सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान बीआईटी मेसरा ने जांच रिपोर्ट दाखिल की।
इस रिपोर्ट में कर्मचारी चयन आयोग द्वारा अपनाए गए नार्मलाइजेशन नियम को नियमानुसार सही बताया गया है। हाईकोर्ट के पिछले आदेश के आलोक में संस्थान ने यह जांच रिपोर्ट पेश की है। अदालत ने मामले की विस्तृत सुनवाई के लिए 20 नवंबर की तारीख निर्धारित की है।
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नार्मलाइजेशन नियम पर विवाद
याचिकाकर्ता गिरिधर रावत और अन्य अभ्यर्थियों का आरोप है कि अधिक अंक मिलने के बाद भी उनसे कम अंक वाले अभ्यर्थियों का चयन कर लिया गया। उनका कहना है कि नार्मलाइजेशन नियम के कारण उनके अंकों में कमी आई।
यह प्रक्रिया कई चरणों में आयोजित होने वाली परीक्षाओं में अपनाई जाती है ताकि प्रश्नपत्र के स्तर से अभ्यर्थियों को नुकसान न हो। सहायक आचार्य के कुल 26,001 पदों के लिए परीक्षा हुई थी। योग्य अभ्यर्थी न मिलने के कारण केवल लगभग 13 हजार अभ्यर्थियों की ही अनुशंसा की गई, जिनकी नियुक्ति हो चुकी है।