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झारखंड की विरासत को मिला कानूनी संरक्षण: प्रदेश के 11 उत्पादों को मिला जीआई टैग, वैश्विक पहचान की ओर बड़ा कदम

Thu, 18 Jun 2026 01:19 PM IST
राँची ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची

सार

झारखंड को जीआई टैग के क्षेत्र में बड़ी सफलता मिली है। राज्य के 11 पारंपरिक उत्पादों को भौगोलिक संकेतक (जीआई) टैग मिलने से उनकी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान मजबूत होगी तथा स्थानीय कारीगरों और उत्पादकों को आर्थिक लाभ मिलेगा।
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जीआई टैग से प्रदेश के उत्पादों को मिलेगा बढ़ावा। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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झारखंड की अनूठी कला, शिल्प, कृषि उत्पादों और पारंपरिक वस्तुओं को पहचान दिलाने, उन्हें बढ़ावा देने के लिए प्रदेश सरकार लगातार प्रयास कर रही है। इसी दिशा में एक बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। जीआई रजिस्ट्री ने हाल ही में राज्य के 11 और महत्वपूर्ण उत्पादों को भौगोलिक संकेतक (जीआई) टैग प्रदान किया है। इन पहलों का मुख्य उद्देश्य झारखंड के पारंपरिक उत्पादों को कानूनी सुरक्षा प्रदान करना, बाजार में उनकी पहचान बढ़ाना और उन्हें राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर स्थापित करना है।  
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 ये उत्पाद हुए जीआई क्लब में शामिल
बता दें कि कुचाई सिल्क साड़ी, भगैया साड़ी, दुमका चादर बदोनी पुतुल (कठपुतली), पंछी परहान पंछी साड़ी, टसर सिल्क साड़ियां, डोकरा क्राफ्ट, आदिवासी आभूषण,  बांस शिल्प केसरिया कलाकंद, बेनाम, झारखंड जादुपटुआ पेंटिंग शामिल हैं। इन सभी नए जीआई टैगों का आधिकारिक प्रकाशन अगले कुछ दिनों में कर दिया जाएगा। वर्ष 2019 तक झारखंड के पास केवल एक जीआई-टैग उत्पाद (सोहराई और खोवर पेंटिंग) था, लेकिन अब यह संख्या बढ़कर 12 हो गई है, जो जीआई परिदृश्य में राज्य की बढ़ती ताकत को दर्शाता है।

झारक्राफ्ट की बड़ी उपलब्धि
उद्योग विभाग के तहत कार्यरत झारक्राफ्ट और मुख्यमंत्री लघु एवं कुटीर उद्यम विकास बोर्ड वर्ष 2019 से ही जीआई पंजीकरण गतिविधियों को सक्रिय रूप से बढ़ावा दे रहे हैं। खास बात यह है कि झारक्राफ्ट ने एक साथ तीन उत्पादों झारखंड की टसर सिल्क साड़ियां, आदिवासी आभूषण व बांस शिल्प  के लिए जीआई पंजीकरण सुरक्षित किया है। ये पंजीकरण झारखंड के कारीगरों और पारंपरिक समुदायों द्वारा तैयार किए गए उत्पादों की दृश्यता, प्रामाणिकता और बाजार क्षमता को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाएंगे। 
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देवघर पेड़ा, रागी, रुगड़ा, धुस्का, कुसुमी लाहा समेत अन्य कतार में
झारखंड की यह जीआई यात्रा राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक ज्ञान की रक्षा के लिए एक मजबूत आधार तैयार कर चुकी है। इसके अतिरिक्त, कई अन्य अनूठे उत्पादों के आवेदन भी जीआई रजिस्ट्री में जमा किए गए हैं, इनमें मांदर, प्यतकर पेंटिंग, निमुचा/करनी शॉल, लाह की चूड़ियां, देवघर पेड़ा, रागी, रुगड़ा, धुस्का, कुसुमी लाहा, साल के बीज, महुआ का फूल और करंज के बीज शामिल हैं। राज्य में अभी भी कई और स्वदेशी उत्पादों को जीआई ढांचे के तहत लाने और राष्ट्रीय व वैश्विक बाजारों में उन्हें सही पहचान दिलाने की अपार संभावनाएं मौजूद हैं।
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