झारखंड में एड्स मरीजों की संख्या 25,757 है। इनमें से 20,919 मरीजों का एआरटी सेंटर में इलाज चल रहा है। बाकी जो बचे हुए मरीज हैं वो दूसरे राज्यों में चले गए हैं या फिर वह अपना इलाज नहीं करा रहे हैं।
कोरोना के समय में एचआईवी टेस्ट रहे शून्य
झारखंड एड्स कंट्रोल सोसाइटी की रिपोर्ट के मुताबिक, कोरोनाकाल में एचआईवी टेस्ट शून्य रहे हैं। इस वक्त अधिकतर सरकारी अस्पताल कोरोना महामारी से निपटने में व्यस्त हैं, साथ ही निजी अस्पताल में एक भी एचआईवी के टेस्ट नहीं हो पाया है। रिपोर्ट में जो एचआईवी मरीजों की संख्या बताई गई है, वह आंकड़े 2002 से अब तक के बताए गए हैं। जो 25,757 मरीजों की संख्या बताई गई है, यह आंकड़ा भी कोरोनाकाल से पहले का ही बताया गया है।
झारखंड के छह जिलों में सबसे ज्यादा एचआईवी के मरीज हैं। इनमें रांची, हजारीबाग, धनबाद, पूर्वी सिंहभूम, गिरीडीह और कोडरमा जिले शामिल हैं। रांची में एचआईवी के 5,286 मरीज हैं, हजारीबाग में 5,485, जमशेदपुर में 3,961, धनबाद में 1,902, गिरिडीह में 1,726 और कोडरमा में अब तक 1,220 मरीज सामने आ चुके हैं।
एड्स मरीजों को दी जाती है पेंशन
राज्य में एड्स के मरीजों को राज्य सुरक्षा पेंशन के तहत दवा लेने के लिए, आने-जाने के लिए प्रतिमाह एक हजार रुपये दिए जाते हैं। इस वक्त 3,500 मरीज इस योजना का लाभ उठा रहे हैं। राज्य में 24 सदर अस्पताल और तीन मेडिकल कॉलेज हैं और यहां पर एचआईवी की निशुल्क जांच की जाती है।