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उच्च न्यायालय ने बाबूलाल मरांडी के खिलाफ दलबदल की कार्रवाई की स्थगित

Thu, 17 Dec 2020 09:35 PM IST
संजीव कुमार झा पीटीआई, रांची
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बाबूलाल मरांडी - फोटो : PTI
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झारखंड उच्च न्यायालय ने भाजपा विधायक दल के नेता बाबूलाल मरांडी के खिलाफ राज्य विधानसभा अध्यक्ष द्वारा ‘दलबदल निरोधक कानून’ के तहत प्रारंभ की गयी कार्यवाही पर गुरुवार को अंतरिम रोक लगा दी।

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मुख्य न्यायाधीश डॉ रवि रंजन और न्यायमूर्ति एसएन प्रसाद की खंडपीठ ने मरांडी की याचिका पर सुनवाई करते हुए विधानसभाध्यक्ष द्वारा उनके खिलाफ प्रारंभ की गयी कार्यवाही 13 जनवरी तक स्थगित रखने के निर्देश दिये।

अदालत ने इस मामले में विधानसभा अध्यक्ष और राज्य सरकार को नोटिस जारी किये हैं। नोटिस का जवाब इस मामले की सुनवाई की अगली तारीख 13 जनवरी तक देने हैं।

ज्ञातव्य है कि झारखंड विधानसभा अध्यक्ष रवीन्द्र नाथ महतो ने अब तक भाजपा विधायक दल के नेता बाबूलाल मरांडी को विपक्ष के नेता के रूप में मान्यता नहीं दी है और उनकी पार्टी झारखंड विकास मोर्चा के भाजपा में विलय के बावजूद उन्हें भाजपा विधायक मानने से इनकार कर दिया है।
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इसी के मद्देनजरविधानसभा अध्यक्ष ने इस मामले का स्वत: संज्ञान लेते हुए मरांडी को नोटिस जारी कर उनके खिलाफ दलबदल कानून के तहत कार्यवाही शुरू की। इस मामले में अब तक दो तारीखें भी पड़ चुकी हैं।

मरांडी ने विधानसभा अध्यक्ष की ओर से दसवीं अनुसूची का इस्तेमाल करते हुए दलबदल के लिए उन्हें जारी नोटिस की वैधता को उच्च न्यायालय में चुनौती दी है।

उच्च न्यायालय में सुनवाई के दौरान मरांडी की ओर से कहा गया कि विधानसभा अध्यक्ष को दलबदल मामले में स्वतः संज्ञान लेने का अधिकार नहीं है। विधानसभा अध्यक्ष इस मामले में तभी सुनवाई कर सकते हैं जब इस संबंध में उन्हें कोई आवेदन दिया गया हो।

राज्य सरकार की ओर से दावा किया गया कि विधानसभा के नियमों के तहत विधानसभा अध्यक्ष को इस तरह के मामले में दलबदल का नोटिस जारी करने का अधिकार है।

इसके अलावा बुधवार को मरांडी को नेता प्रतिपक्ष बनाने की मांग वाली भाजपा के बिरंची नारायण की याचिका पर भी इसी पीठ के समक्ष सुनवाई हुई थी। इस याचिका में कहा गया है कि मरांडी को भाजपा ने अपने दल का नेता घोषित किया है लेकिन विधानसभा अध्यक्ष ने अभी तक उन्हें नेता प्रतिपक्ष की मान्यता नहीं दी है।

उच्च न्यायालय इन दोनों मामलों में एक साथ सुनवाई कर रहा है। उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने इस मामले में अब विधानसभा अध्यक्ष और राज्य सरकार को नोटिस जारी करते हुए अपना पक्ष रखने के लिये कहा है। इस मामले में 13 जनवरी को आगे सुनवाई होगी।

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