झारखंड के हजारीबाग में दो सरकारी अफसरों के बीच का विवाद आजकल सोशल मीडिया पर सुर्खियां बटोर रहा है। हजारीबाग के डीसी रविशंकर शुक्ल पर टॉर्चर का आरोप लगाते हुए एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट दीपमाला ने एक खुला पत्र लिखा है जो व्हाट्स ऐप पर वायरल हो गया। महिला अधिकारी ने इस पत्र में डीसी पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं।
दीपमाला नाम की अधिकारी ने इस संबंध में अभी तक अपने वरिष्ठ अधिकारियों को कोई शिकायत नहीं दी थी लेकिन वायरल हुई चिट्ठी पर संज्ञान लेते हए अपर मुख्य सचिव कार्मिक, केके खंडेलवाल ने उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडलीय आयुक्त से पूरे मामले पर रिपोर्ट तलब कर ली है। उधर, झारखंड राज्य प्रशासनिक सेवा संघ (झासा) ने भी हजारीबाग जिला यूनिट से पूरे मामले की जांच करने को कहा है।
अब ये मामला हाई प्रोफाइल हो चुका है प्रशासनिक कार्यशैली में महिलाओं के प्रति होने वाले व्यवहार पर कई सवाल भी उठ रहे हैं। दरअसल महिला ने इस खुली चिट्ठी में अपने वरिष्ठ पर जान बूझ कर परेशान करने का आरोप लगाया है। नौ पन्नों की चिट्ठी में पांच गंभीर आरोप लगायें है जो वरिष्ठ अधिकारी पर कानूनी कार्रवाई के लिए काफी साबित हो सकते हैं।
महिला एग्जिक्यूटिव मजिस्ट्रेट लगाए 5 गंभीर आरोप
1.
बेईज्जत करते हैं डीसी
दीपमाला ने पत्र में लिखा है 'डीसी सार्वजनिक रूप से बेइज्जत करते हैं। वे किसी एक को टार्गेट कर चिल्लाते हुए डांटते हैं कि शेष सब के बीच भय का माहौल कायम हो। डीसी का ट्रांसफर होने पर वह लड्डू बाटेंगी। मैं एक साल से फीयर सायकोसिस में जी रही हूं। मुझे किसी का सपोर्ट नहीं चाहिए। मै जानती हूं कि पत्र लिखने का नतीजा कितना खराब होगा।
2.
वेतन ही किया बंद
हजारीबाग का कई क्षेत्रों में नेशनल लेवल पर अच्छा स्थान है, पर इसमें डीसी का नहीं, जिले के विभिन्न बीडीओ-सीओ का योगदान है, जिनसे बंधुआ मजदूरों से भी खराब तरह से काम लिया जाता है। रात-दिन काम करने के बाद भी इनके गले पर प्रपत्र का तलवार लटका कर काम लिया जाता है। कई अफसरों की सैलरी पिछले छह महीने से बंद है।
3.
रेप का भी जताया डर
दीपमाला ने आरोप लगाया है कि झासा के अधिकारी को डेरोगेट कर डीसी को सैडिस्टिक प्लेजर का अनुभव होता है। अकेली मां होने के कारण छोटा बेटा रात में मेरे साथ रहना चाहता है। जब से यह बताया, उन्होंने जानबूझ कर रात में ही ड्यूटी लगाई। वह भी वहां, जहां महिला अधिकारी सुरक्षित नहीं। ऐसे में उनका रेप या हत्या हो जाए तो क्या डीसी उसकी जिम्मेवारी लेंगे।
4.
नहीं मिलता स्पेशल लीव
19 अगस्त को दो दिन के स्पेशल लीव के लिए आग्रह किया, पर डीसी ने कहा कि वह लिख कर दें कि ऐसे डीसी के साथ वह काम नहीं कर सकती या छुट्टी पर चली जाएं। फिर राइस मिल सील करने की ड्यूटी लगा दी। बदला लेने की भावना से 20 अगस्त से लगातार पांच दिन तक ड्यूटी लगा दी। स्पेशल लीव रद्द करने का डीसी को काेई अधिकार नहीं।
5.
अब जरूर खोजेंगे गलती
दीपमाला ने पत्र में आशंका जाहिर की है कि अब उसके काम में गलती खोजने की डीसी हर संभव कोशिश करेंगे। इसके बाद उन्हें नौकरी से हटाए जाने का प्रयत्न किया जाएगा। पर, वह इसके लिए तैयार हैं, क्योंकि मेंटली टॉर्चर किए जाने के बाद अब वह मानसिक रूप से मजबूत हो गई हैं। उन्होंने लिखा है कि वह पिछले एक साल से परेशान हैं।
दीपमाला ने साफ कहा है कि सबके सामने बेइज्जत करते हैं डीसी और जानबूझ कर रात को ड्यूटी लगाते हैं। एक साल से वो बहुत परेशान हैं, इसलिए जाे भी मन में आया वह सब लिख दिया। दीपमाला ने माना कि अभी वरीय अधिकारियों को उन्होने कोई पत्र नहीं भेजा है। अपने ऊपर गंभीर आरोप की सफाई पर डीसी रविशंकर शुक्ल ने कहा कि उनके ऊपर लेगे आरोप बेबुनियाद हैं और दीपमाला को सदैव स्पेशल लीव मिलता रहा है। अभी भी स्पेशल लीव दिया गया है। डीसी ने ये भी कहा कि हमें एक दूसरे के सहयोग से योजनाएं पूरी करनी हैं।
महिलाओं के साथ कार्य स्थल पर भेद भाव और शारीरिक या मानसिक शोषण कानूनन जुर्म है और दोषी पाये जाने पर कड़ी सजा भी हो सकती है। लेकिन सरकारी और हाई-प्रोफाइल मामला होने के नाते सरकार ने फौरन जांच के आदेश दे दिए हैं।