झारखंड सरकार ने आंध्र प्रदेश की कंपनी केपीआर एग्रोकेम कंपनी को टेंडर से जुड़े दस्तावेज में बदलाव कर एल-वन घोषित किया और पशु चारा आपूर्ति का आदेश दिया, वह चारा घटिया क्वालिटी का निकला है। पहले कृषि विभाग ने राज्य सरकार के होटवार स्थित कारखाने से चारा खरीदने का फैसला किया था, लेकिन कृषि मंत्री ने इसका विरोध कर चारा खरीदने के लिए टेंडर जारी करने का आदेश दिया।
मंत्री ने विभाग के फैसले को पलटा
झारखंड सरकार के पशुपालन विभाग ने अप्रैल 2016 में 4.65 करोड़ रुपये की लागत से पशु चारा (मिनरल मिक्चर एमिनो एसीड के साथ) खरीदने का निर्णय किया था। विभाग ने पशु चारा के लिए सरकारी पैसे से होटवार में चारा कारखाना लगा कर उसे चलाने की जिम्मेवारी झारखंड मिल्क फेडरेशन (मिल्क फेड)को दी। जिसके बाद सचिव स्तर पर बातचीत के बाद जून 2016 में मिल्क फेड से चारा खरीदने का फैसला किया गया।
मिल्क फेड ने भी पांच लाख किलो चारा आपूर्ति करने पर सहमति दे दी। लेकिन विभाग के मंत्री रणधीर सिंह ने पशुपालन विभाग के निर्णय को मानने से मना कर दिया चारा खरीदने के के लिए टेंडर निकालने का आदेश दे दिया। मंत्री के आदेश के बाद गव्य निदेशालय ने अक्तूबर 2016 में टेंडर निकाला और टेंडर में इसका उल्लेख ही नहीं किया गया कि मिक्चर मिनरल कैसा होना चाहिए और उसका कंपोजिशन क्या होना चाहिए।
कागजों में गड़बड़ी कर केपीआर को दिया टेंडर
पशु चारा की आपूर्ति के लिए टेंडर में सात कंपनियों ने हिस्सा लिया। इनमें दिल्ली की मेसर्स आयुर्वेद लिमिटेड, उत्तर प्रदेश की इंडियन हर्ब, बिहार की श्री वैद्यनाथ, दमन की बेडर शल्ज, कर्नाटक की प्रोविमी न्यूट्रिन ,तेलंगाना की ब्रिलियेंट बायो और आंध्र प्रदेश की केपीआर एग्रोकेम शामिल थी। निदेशालय की ओर से जारी शर्तों के मुताबिर टेंडर प्रक्रिया में हिस्सा लेनेवाली कंपनी को पशु चारा (मिनरल मिक्चर) के निर्माण और व्यापार में कम से कम 10 साल का अनुभव होना अनिवार्य था।
आंध्र प्रदेश की कंपनी केपीआर के पास 10 साल का अनुभव नहीं था, लिहाज वो इस शर्त के दायरे से बाहर थी। आंध्र प्रदेश सरकार ने उसे अप्रैल 2011 में मिनरल मिक्चर बनाने का लाइसेंस (नंबर -12/ईजी/ एपी/2011/बी/आर) दिया था। बावजूद इसके दस्तावेजों में गड़बड़ी कर इस कंपनी को 'एल-वन' घोषित कर दिया गया और इसे चारा आपूर्ति करने का आदेश दे दिया गया।
जांच में चारा घटिया पाया गया
टेंडर की शर्तों के मुताबिक पशु चारे की गुणवत्ता सही पाए जाने पर ही कंपनी को भुगतान करना था। इसके लिए केपीआर कंपनी ने हरियाणा की पंचकुला की एक लेबोरेटरी की रिपोर्ट जमा की, जिसमें उसके उत्पाद की गुणवत्ता को सही करार दिया गया था। जबकि सेंटर फॉर एनालिसिस एंड लर्निंग इन लाइव स्टॉक एंड फूड (सीएएलएफ) ने परीक्षण और विश्लेषण के बाद इस कंपनी की ओर से आपूर्ति किए गए मिनरल मिक्चर को निम्न स्तर का बताया है।