फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

हाथों में तख्तियां लेकर निकले पत्नी पीड़ित पति, क्या था मामला?

विज्ञापन
विज्ञापन
दो दिन पहले जहां पूरा देश फादर्स डे मना रहा था वहीं रांची के पुरुषों ने हाथों में तख्तियां लेकर एक अलग रैली निकाली। काफी संख्या में पहुंचे पुरुषों के इस जत्थे ने राजभवन के सामने नारेबाजी कर अपना विरोध जताया।
विज्ञापन


असल में ये पत्नी पीड़ित पतियों का वो एक समूह था जो दहेज विरोधी कानून के विभिन्न मामलों में फंसे हुए थे। इनकी पत्नियों ने इन पर दहेज उत्पीड़न के मामले दर्ज करा रखे हैं, जिन्हें झूठा बताते हुए इन पुरुषों ने इस खत्म करने की मांग की।

अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के अनुसार सेव इंडियन फैमिली फाउंडेशन के बैनर तले पहुंचे इन लोगों ने तटस्थ लिंग कानून की मांग की जिससे पुरुषों के मामलों को भी सुना जा सके।
विज्ञापन
Trending Videos
विज्ञापन

पतियों के लिए भी पुरुष आयोग बनाने की मांग

इन लोगों की प्रमुख मांग थी दहेज कानून के सेक्‍शन 498 ए को जमानती करने की थी। एसआईएफएफ के अध्यक्ष दीपम बनर्जी ने कहा कि हमने अपनी बात रखने को फादर्स डे को इसलिए चुना कि दहेज विरोधी कानून के झूठे मामलों में फंसे कई पिताओं को अपने बच्चों से मिलने का हक भी नहीं मिल पाता है।
 
बनर्जी कहते हैं कि ऐसे मामलों में पुलिस काफी तेजी से कार्रवाई करते हुए पतियों को गिरफ्तार कर लेती है जबकि यह जानने का भी प्रयास नहीं किया जाता कि मामला झूठा है या असली। जब मामला फर्जी निकलता है तो व्यक्ति अपना मान सम्मान और नौकरी तक खो देता है। कई मामलों में तो लोग अपनी जान तक दे देते हैं।

उन्होंने कहा एसआईएफएफ सदस्य महिला आयोग की तरह ही एक पुरुष आयोग के गठन की मांग करती है। जिससे पत्‍नी और ससुरालियों द्वारा प्रताड़ित पतियों को भी न्याय मिल सके और वो भी ऐसे मामलों में अपनी शिकायत दर्ज करा सकें।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें