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नक्सलियों ने शहीद जवानों के पेट में लगाए बम

Thu, 10 Jan 2013 11:59 PM IST
रांची/नई दिल्ली/एजेंसी
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नक्सलियों ने बर्बरता की तमाम सीमाएं लांघते हुए आपसी संघर्ष में शहीद सीआरपीएफ के जवानों के पेट में बम फिट कर दिए। नक्सलियों और सुरक्षा बलों के बीच लंबे समय से जारी संघर्ष में पहली बार इस तरह की घटना सामने आई है। इसने सुरक्षा बलों और देश को झकझोर दिया है।
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झारखंड के लातेहार जिले में पुलिस ने बृहस्पतिवार को बताया कि नक्सलियों ने दो शहीद जवानों के पेट की सर्जरी करके उनमें ये बम लगाए थे। तीन दिन पहले नक्सलियों से हुई मुठभेड़ में ये जवान शहीद हुए थे।

झारखंड के डीजीपी जीएस रथ ने बताया कि बुधवार की शाम को पुलिस को लातेहार में एनकाउंटर स्थल के नजदीक शहीदों के शव मिले थे। इनमें से एक शहीद बैद्यनाथ किस्कू के शव में लगा बम फट गया, जिससे कुछ जवान घायल हुए।
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वहीं रांची के सरकारी अस्पताल में डॉक्टरों ने 29 वर्षीय शहीद बाबूलाल पटेल के शव का पोस्टमार्टम कर डेढ़ किलो का बम निकाला। पटेल इलाहाबाद के रहने वाले थे। केंद्रीय गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे ने नक्सलियों की इस कार्रवाई की कड़ी निंदा करते हुए कहा है कि वे सुरक्षा बलों के खिलाफ नई रणनीतियां बना रहे हैं।

रथ ने बताया, ‘डॉक्टरों ने जब शहीद का शव देखा था तभी उन्हें संदेह हुआ था कि कुछ गड़बड़ है। शव के पेट पर टांके लगे थे। इसके बाद उन्होंने बम डिस्पोजल स्क्वाड को बुला कर शव खुले मैदान में रखवा दिया।’ पुलिस के अनुसार जब शव का एक्स-रे किया गया तब उसमें बम नजर आया। बाद में विशेषज्ञों ने बम को निष्क्रिय किया।
रथ ने बताया कि यह एक ‘प्रेशर बम’ था, जो जरा-सी तकनीकी चूक से फट सकता था। उन्होंने कहा कि जवानों के शव हेलीकॉप्टर से लातेहर से रांची लाए गए थे।

उल्लेखनीय है कि सात जनवरी को लातेहार में नक्सलियों और सुरक्षा बलों के बीच मुठभेड़ हुई थी। बृहस्पतिवार तक इसमें मरने वालों की संख्या 14 तक पहुंच चुकी है। जिनमें 9 सीआरपीएफ के शहीद हैं, एक राज्य के नक्सल-विरोधी बल ‘झारखंड जगुआर्स’ का सदस्य है और चार नागरिक हैं।

शहीद हुए जवानों में तीन हरियाणा के हैं। लातेहार के एसपी क्रांति कुमार के अनुसार मुठभेड़ में नौ नक्सली मारे गए और अनेक घायल हुए। लेकिन नक्सली अपने मृत साथियों के शव और घायलों को घसीट ले गए।

ताकि जाए और जानें
पुलिस का कहना है कि नक्सलियों की रणनीति शहीदों के शवों में बम लगाकर सुरक्षा बलों को ज्यादा से ज्यादा क्षति पहुंचाने की है। शहीद के शव में से बम को हटाते वक्त उसके फटने की आशंका होती है। नक्सली पहले शहीदों के शव के नजदीक विस्फोटक रखा करते थे, लेकिन यह पहला मौका है जब उन्होंने शहीदों के शरीर में बम फिट कर दिए।

नक्सलियों ने आंतें निकाल लगाए बम
नक्सलियों ने शहीद जवानों के पेट में बम लगाने के लिए जो बर्बरता दिखाई उसने डॉक्टरों के भी रोंगटे खड़े कर दिए। रांची इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के डॉक्टरों के अनुसार नक्सलियों ने शहीद जवानों की आंतें और तिल्ली (स्प्लीहा) निकाल कर उनके शव में खाली जगह बनाई और वहां डेढ़ किलोग्राम के बम लगाए।

उन्होंने एक प्लास्टिक कंटेनर में जिलेटिन छड़ों, एक डेटोनेटर और एक बैटरी की मदद से तैयार बम शहीदों के शव के भीतर रखे। अस्पताल के एक वरिष्ठ डॉक्टर के अनुसार नक्सलियों ने अपनी बर्बर हरकत के बाद बड़ी ही सफाई से टांके लगाकर काटी हुई जगह को सिलने की कोशिश की।

जो शहीद हुए
- प्रदीप यादव (हरियाणा), रोहताश सिंह (हरियाणा), सुनील कुमार (हरियाणा), यशबीर सिंह (मप्र) सीआरपीएफ की 134वीं बटालियन के।
- सुधीस कुमार (केरल), बाबूलाल पटेल (उप्र.), चंपालाल मालवीय (मप्र.), बैद्यनाथ किस्कू (झारखंड), शंकर लाल चौधरी (राजस्थान) सीआरपीएफ की 112वीं बटालियन के।
- मुकेश कुमार शर्मा (बिहार) झारखंड जगुआर्स के।

नहीं गिरेगा सीआरपीएफ का मनोबल: गृहमंत्री
सुरक्षा एजेंसियां झारखंड में नक्सलियों के सीआरपीएफ जवानों के शव के भीतर बम रखने की नए पैंतरे की काट जल्द ही ढूंढ लेंगे। गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे ने यह भरोसा दिलाते हुए कहा है कि ऐसी घटना से केंद्रीय रिजर्व पुलिस फोर्स (सीआरपीएफ) के जवानों का मनोबल नहीं गिरा है। सीआरपीएफ अनुभवी फोर्स है और उसे मालूम है कि अपराधियों के ऐसे हथकंडों से कैसे निबटा जाना है।

शिंदे ने कहा है कि इसकी जवाबी कार्रवाई पर गहन विचार विमर्श किया जा रहा है। गृहमंत्री के मुताबिक नक्सली हर बार नए हथकंडे अपनाते हैं ताकि उनके खिलाफ हो रही सख्ती पर अंकुश लग सके। लेकिन नक्सल प्रभावित  इलाकों में तैनात अर्धसैनिक बल इसकी काट भी जल्द ही निकाल लेंगे।

अब क्यों खामोश हैं मानवाधिकार संगठन: भाजपा
भाजपा ने सुरक्षा बलों के जवानों के शवों में नक्सलियों द्वारा बम लगाए जाने की हरकत की कड़ी निंदा की है। पार्टी ने इस मुद्दे पर खामोश मानवाधिकार संगठनों व कार्यकर्ताओं को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि वे अब मौन क्यों हैं।

पार्टी प्रवक्ता निर्मला सीतारमन ने कहा कि सेना, सुरक्षा बलों व पुलिस के जवानों के खिलाफ आए दिन मानवाधिकार के मामले उठाने वाले संगठन और कार्यकर्ता अब खामोश क्यों हैं। उन्हें इस मामले पर भी अपना मुंह खोलना चाहिए।

निर्मला ने कहा कि उन्हें यह भी मालूम होना चाहिए कि मानवाधिकार सिर्फ नक्सलियों के ही नहीं, बल्कि जवानों के भी होते हैं। भाजपा ने सरकार से नक्सलियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
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