झारखंड में राजनीतिक खींचतान और अस्थिरता के चलते अब सरकारी कामकाज भी थम गया है। मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री व अन्य विभागीय मंत्रियों ने विभिन्न फैसलों से संबंधित फाइल्स लौटा दी हैं। मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा के मंगलवार को इस्तीफे के बाद सारे महत्वपूर्ण कार्य रुक गये हैं।
इस स्थिति के चलते राज्य हित के महत्वपूर्ण फैसलों पर निर्णय नहीं लिया जा सका। अब राज्य में 43 लाख स्कूली बच्चों को ड्रेस भी नहीं मिल सकेगी। राज्य के लिये स्थानीयता नीति निर्धारित करने, प्रशासनिक सेवा के पुनर्गठन, सिकनी कोलियरी को नोमिनेशन पर देने, कोर कैपिटल के शिलान्यास, विधानसभा सचिवालय भवन का शिलान्यास, हाई सिक्यूरिटी नंबर, बाल श्रम आयोग व तकनीकी विश्वविद्यालय के गठन सहित दर्जनों बड़े फैसले लटक गये हैं।
मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने बुधवार को आरोपियों पर कार्रवाई व अन्य योजनओं से जुड़ी 100 ये ज्यादा फाइलें बिना किसी निर्णय के लौटा दीं। वहीं, निवर्तमान उप मुख्यमंत्री हेमत सोरेन के पास पहली जनवरी से ही फाइलें नहीं भेजी जा रही थीं। सत्यानंद झा बाटुल ने भी कृषि व पशुपालन योजनाओं से जुड़ी 50 से अधिक फाइलें सात जनवरी की तिथि पर हस्ताक्षर के बाद वापस कर दीं।
मुख्यमंत्री सचिवालय द्वारा लौटायी गयी फाइलों में से करीब 10 फाइलें राजपत्रित पदाधिकारियों पर लगे आरोपों के आलोक में उन्हें दंडित करने से संबंधित थीं। कुछ पर अधिकारियों पर विभागीय कार्यवाही चलानी थी। भ्रष्टाचार से जुड़ी इन फाइलों को बिना किसी फैसले के लौटाने से इन दोषी अफसरों पर फिलहाल कार्रवाई नहीं की जा सकेगी। उद्योग विभाग, योजना विकास विभाग द्वारा अधिकारियों के तबादले से संबंधित फाइलों को भी मुख्यमंत्री सचिवालय ने बिना किसी फैसले के लौटा दिया है।