झारखंड विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान राज्य सरकार को घेरने की रणनीति को लेकर शुक्रवार को रांची स्थित प्रदेश भाजपा कार्यालय में विधायक दल की बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता प्रदेश अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने की। बैठक में भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. रविंद्र कुमार राय, संगठन महामंत्री कर्मवीर सिंह, पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन सहित पार्टी के कई विधायक और पदाधिकारी मौजूद रहे।
बैठक के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए भाजपा विधायक और मुख्य सचेतक नवीन जायसवाल ने कहा कि बैठक में राज्य के ज्वलंत मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई और सरकार को सदन में कठघरे में खड़ा करने की रणनीति तय हुई।
उन्होंने राज्य सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि हेमंत सोरेन सरकार को विकास से कोई लेना-देना नहीं है। यह सरकार केवल योजनाओं और संस्थानों के नाम बदलने में व्यस्त है। उन्होंने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जैसे महापुरुषों के नामों को योजनाओं से हटाना केवल उनका नहीं, बल्कि देश और राज्य का अपमान है।
जायसवाल ने आरोप लगाया कि सरकार तुष्टीकरण की राजनीति में डूबी हुई है और मदर टेरेसा के नाम पर क्लीनिक योजना शुरू कर धर्मांतरण को बढ़ावा देना चाहती है। उन्होंने कहा कि “हेमंत सरकार की विकास यात्रा अब ‘मदरसा से टेरेसा’ तक सिमट गई है।” इसके साथ ही उन्होंने रिम्स-2 के नाम पर किसानों की भूमि अधिग्रहण की कोशिशों की भी आलोचना की और कहा कि भारी बारिश और अतिवृष्टि से किसानों की फसलें बर्बाद हो रही हैं, लेकिन सरकार मौन है।
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मतदाता सूची पुनरीक्षण को लेकर हो रहे विरोध पर भी भाजपा ने तीखी प्रतिक्रिया दी। जायसवाल ने आरोप लगाया कि सरकार रोहिंग्या और बांग्लादेशी घुसपैठियों को संरक्षण देने की मंशा रखती है। उन्होंने कहा कि पिछड़ों को 27% आरक्षण देने की बात करने वाली सरकार अगर वास्तव में ईमानदार है तो निकाय चुनावों में इस आरक्षण को लागू करे।
जायसवाल ने यह भी कहा कि सदन में राज्य की बिगड़ती कानून-व्यवस्था, महिलाओं पर बढ़ते अत्याचार और प्रशासनिक विफलताओं को प्रमुख मुद्दा बनाया जाएगा। बैठक में विधायक नवीन जायसवाल, नागेंद्र महतो, नीरा यादव, मनोज यादव, सत्येंद्र तिवारी, आलोक चौरसिया, देवेंद्र कुंवर, अमित यादव, रोशनलाल चौधरी, उज्जवल दास, प्रदीप प्रसाद, पूर्णिमा दास साहू और मंजू कुमारी सहित कई नेता शामिल रहे।