राज्य में कानून व्यवस्था की यह स्थिति है कि एक अधिकारी गिरफ्तारी वारंट जारी होने के बाद भी आराम से दफ्तर में काम कर रहे हैं। चाईबासा के डीसीएलआर शंकर यादव के खिलाफ कोडरमा सिविल कोर्ट ने वारंट जारी किया है। वारंट जारी होने के करीब 10 दिन बाद भी अब तक उनकी गिरफ्तारी नहीं हुई है। वह बेधड़क अपने कार्यालय में बैठ कर कामकाज निबटा रहे हैं।
शंकर यादव के खिलाफ साल 2008 में कोडरमा में जिला परिवहन पदाधिकारी के पद पर रहने के दौरान फर्जी चालान के मामले में प्राथमिकी दर्ज हुई थी। उनके लिये 10 दिन पहले वारंट भी जारी हुआ है। बताया जा रहा है कि पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार करने की एक बार कार्रवाई की थी, पर फिर लौट गयी।
इतना ही नहीं शंकर यादव अपने तबादले के बावजूद भी चाईबासा में ही काम कर रहे हैं। उनका तबादला दो महीने पहले ही घाटशिला डीसीएलआर के रूप में हुआ था, पर उन्होंने योगदान नहीं दिया। उन्होंने चाईबासा का कार्यभार भी नहीं छोड़ा। अब भी वह चाईबासा में ही डीसीएलआर के पद पर कार्य कर रहे हैं। सरकार के आदेश के बाद भी वह घाटशिला नहीं गये।