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Jharkhand: लातेहार सिविल कोर्ट में हिंसा के आरोप में 30 टाना भगत आदिवासी गिरफ्तार, भेजा गया जेल

Tue, 11 Oct 2022 09:59 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची

सार

पुलिस निरीक्षक अमित कुमार ने कहा, कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अदालत के साथ-साथ जिला कलेक्ट्रेट में और उसके आसपास एक मजबूत पुलिस दल तैनात किया गया है। इसके अलावा, पुलिस जिला मुख्यालय शहर के सभी रणनीतिक बिंदुओं पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है।
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लातेहार सिविल कोर्ट - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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झारखंड की लातेहार सिविल कोर्ट ने मंगलवार को 30 टाना भगतों को जेल भेज दिया है। पुलिस ने कुल 228 लोगों के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज की थी। आरोप है कि इन्होंने पुलिस पर पथराव किया जिससे सत्रह पुलिसकर्मी घायल हुए। इसके अलावा मुख्य न्यायाधीश की पांच घंटे तक घेराबंदी की और अदालत के प्रवेश और निकास द्वार को बाधित किया। 

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पुलिस निरीक्षक अमित कुमार ने कहा, 'अखिल भारतीय ताना भगत समिति' के सचिव बहादुर ताना भगत और  उसके नेता राजेंद्र ताना भगत, मनोज कुमार मिंज, धर्मदेव भगत, धनेश्वर टोप्पो और अजीत मिंज के खिलाफ लोगों को भड़काने की प्राथमिकी दर्ज है। 

उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अदालत के साथ-साथ जिला कलेक्ट्रेट में और उसके आसपास एक मजबूत पुलिस दल तैनात किया गया है। इसके अलावा, पुलिस जिला मुख्यालय शहर के सभी रणनीतिक बिंदुओं पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है, आशंका है कि टाना भगत फिर से इसमें प्रवेश कर सकते हैं। 
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कुमार के मुताबिक, घटना के बाद रांची से करीब 110 किलोमीटर दूर नक्सल प्रभावित लातेहार में पुलिस ने सोमवार को मौके से 22 मोटरसाइकिलें जब्त की थीं। समस्या सोमवार को तब शुरू हुई, जब 500  लोगों की सशस्त्र भीड़ ने जिला प्रशासन पर संवैधानिक प्रावधानों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए पांच घंटे तक अदालत का घेराव किया और पारंपरिक शासन की बहाली की मांग की। लातेहार संविधान की पांचवीं अनुसूची के तहत आता है। जब पुलिस कर्मियों ने परिसर खाली करने का प्रयास किया तो उन्होंने पुलिस पर पथराव किया। 

उन्होंने बताया कि प्रदर्शनकारियों ने अदालत परिसर में जिला न्यायाधीश के कार्यालय के दरवाजे के फ्रेम मेटल डिटेक्टर को भी तोड़ दिया। पुलिस ने खुफिया सूचना के आधार पर अदालत के मुख्य द्वार को बंद कर दिया था, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने मुख्य द्वार के बगल में स्थित छोटे गेट से जबरन अपना रास्ता बना लिया। 

टाना भगत आदिवासियों द्वारा पथराव में कुमार के अलावा एक सब-इंस्पेक्टर, दो असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर और तीन महिला कांस्टेबल समेत 16 पुलिसकर्मी घायल हो गए। इसके चलते पुलिस को आंसू गैस के गोले दागने पड़े और हिंसक प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए वाटर कैनन का इस्तेमाल करना पड़ा। 

प्रदर्शनकारियों ने दावा किया कि लातेहार में अदालतों का कामकाज, रोजगार और बाहरी लोगों का प्रवेश 5वीं अनुसूची के तहत प्रतिबंधित है। उन्होंने अपने पारंपरिक सिस्टम की मांग तक आंदोलन जारी रखने की धमकी दी थी। 

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