अगर आपके अपने नवजात बच्चे को बोतल से दूध पिला रहे हैं तो सावधान हो जाइए वह आपको पहचानने में भूल कर सकता है। इसके साथ ही बोतल का दूध पीने वाले बच्चों का बुद्धि लब्धि (आईक्यू) भी कम होता है। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में 100 बच्चों पर चल रहे शोध से यह प्रारंभिक जानकारी मिली है। शोध के मुताबिक ऐसे बच्चे जल्दी-जल्दी बीमार भी पड़ते हैं।
मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ. ओमशंकर चौरसिया बताते हैं कि स्तनपान करने वाले शिशुओं की अपेक्षा बोतल से दूध पीने वाले बच्चों का आईक्यू लेवल आठ से 10 प्वाइंट कम होता है। यही नहीं, मोटापा भी बढ़ता है। वहीं, साफ-सफाई नहीं होने से बोतल से दूध पीने वाले शिशु जल्दी बीमार होते हैं। कभी पेट दर्द, दस्त-उल्टी होती है तो कभी डायरिया। स्तनपान करने वाले शिशुओं में आईक्यू लेवल काफी अच्छा होता है। ऐसे बच्चे काफी एक्टिव होते हैं। ये शिशु पाल्यों (मां-पिता, दादा-दादी, नाना-नानी, चाचा-ताऊ-बुआ आदि) को जल्द पहचानने लगता है।
मेडिकल कॉलेज में 100 शिशुओं पर चल रहा शोध
बच्चा हो जाता है ''निप्पल कंफ्यूजन’ का शिकार
शोध के मुताबिक यदि छह माह के बच्चे को स्तनपान के साथ बोतल से दूध पिलाया जाता है तो बच्चा ‘निप्पल कंफ्यूजन’ का शिकार होता है। इससे बच्चा भूखा रह जाता है और थोड़ी-थोड़ी देर में भूख लगने पर रोता है। फिर चिड़चिड़ा हो जाता है।
दूध की बोतल में पनपते हैं बैक्टीरिया
समुचित साफ-सफाई नहीं से दूध की बोतल में बैक्टीरिया पनपते हैं, जो सीधे बच्चे के पेट में जाकर बीमारी का कारण बनते हैं। इससे शिशु ईकोलाई, साल्मोनेला, स्ट्रेप्टोकोकस आदि बैक्टीरिया की चपेट में आकर पेट दर्द, उल्टी-दस्त, आंतों में संक्रमण का शिकार होता है।
ये बातें ध्यान रखना है जरूरी
डॉ. ओमशंकर चौरसिया बताते हैं कि यदि मां स्वास्थ्य की वजह से स्तनपान कराने के योग्य नहीं है तो कटोरी-चम्मच से दूध पिलाएं। यदि बहुत जरूरी है तभी बोतल से दूध पिलाएं। बोतल को खौलते पानी में डालकर साफ करें। कुछ देर बाद बोतल को निकालकर साफ करें। बोतल की निप्पल सही तरह से साफ करें। बोतल में उतना ही दूध भरे, जितना बच्चा पी सकता है। बचा हुआ दूध दोबारा नहीं पिलाएं।