जोजिला दर्रे में टनल तैयार करना जरूरी
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रियासत में अब तक के सबसे मुश्किल और दुर्गम माने जा रहे जोजिला टनल प्रोजेक्ट को भी घाटी की हिंसा का ग्रहण लग गया। रोड शो के जरिए निर्माण एजेंसियों को आकर्षित करने का फार्मूृला भी सिरे नहीं चढ़ पाया। नेशनल हाईवे इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कारपोरेशन लिमिटेड (एनएचआईडीसीएल) ने इस प्रतिष्ठित प्रोजेक्ट के लिए तीन मर्तबा टेंडर जारी किए ।
लेकिन तीनों ही बार कोई भी निर्माण एजेंसी प्रोजेक्ट को अपने हाथ में लेने को राजी नहीं हुई। इसके पीछे रियासत में आए दिन बनने वाले तनावपूर्ण हालात और बीओटी यानी बिल्ड,ऑपरेट एंड ट्रांसफर मोड है। इसमेें निवेशक को सारा खर्च पहले खुद करना पड़ता है। समय से प्रोजेक्ट पूरा न हो पाने पर घाटे के डर से निर्माण एजेंसियां आगे नहीं आ रहीं।
जोजिला दर्रे पर 14.083 किलोमीटर लंबी टनल बनाई जाएगी। दक्षिण एशिया की सबसे लंबी टनल के प्रोजेक्ट पर 9090 करोड़ रुपये की लागत आएगी। टनल तैयार होने से लद्दाख रीजन साल भर देश से जुड़ा रहेगा। वर्तमान में यह इलाका चार से पांच महीने तक कटा रहता है। यही वजह है कि प्रोजेक्ट को प्रधानमंत्री कार्यालय मानीटर कर रहा है।