जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) के चेयरमैन यासीन मलिक ने कहा कि मैंने कभी भी सरकारी सुरक्षा नहीं ली है। सुरक्षा देने का मुझे कई बार ऑफर दिया गया। तहरीक हमारा इश्क और इबादत है जो मरते दम तक जारी रहेगा।
श्रीनगर में वीरवार को पत्रकारों से बात करते हुए यासीन मलिक ने कहा कि सबसे पहले 1996 में मेरे पास सीआईडी के अधिकारी आए, जिन्होंने मुझे सुरक्षा प्रदान करने की बात रखी, लेकिन मैंने इनकार कर दिया। समय-समय पर सुरक्षा देने की बात रखी गई लेकिन मैंने नहीं माना, मैंने लिखित में भी दिया कि मुझे सुरक्षा नहीं चाहिए। उन्होंने कहा कि पैदा होना और दुनिया से ले जाना अल्लाह के हाथ में है। तब कोई सुरक्षा किसी को बचा नहीं सकती।
मलिक ने कहा कि कभी कहा जाता है यह (अलगाववादी) बीमार होते हैं तो इनका इलाज हम करते हैं। कौन सा और किसका इलाज करते हैं? यह हुकूमत झूठ बोल कर क्या साबित करना चाहती है? हम जेआरएल के रहते साझे बयान जारी करते हैं, लेकिन इसमें मेरा नाम भी आया था, इसलिए मैंने अपनी ओर से अपना पक्ष रखना था।
सुहेल बुखारी (महबूबा मुफ्ती के सलाहकार) ने ट्वीट में लिखा, सुरक्षा वापस लेने का संदेश स्पष्ट है। युद्ध को भड़काने वालों के नक्शे कदम पर चलना, शांति और सामंजस्य की बात न करें, अपना एजेंडा छोड़ दें। वरना हम आपको असुरक्षित बना देंगे।
पीडीपी नेता वहीद-उर-रहमान पररा के अनुसार सुरक्षा वापस लेना कश्मीर में राजनीतिक प्रक्रिया पर पर्दा डालना है, और वे हमारे जीवन को असुरक्षित बनाना चाहते हैं। हमने ऐसे कई उदाहरण देखे हैं जहां राजनेता मारे गए हैं और लोग संकटग्रस्त हुए हैं।