हिंदी एकमात्र ऐसी भाषा है, जिसे जम्मू-कश्मीर का प्रत्येक व्यक्ति बोलता, समझता और पढ़ता है। राज्य के विकास के लिए हिंदी को महत्व देना जरूरी है।- प्रो. परमेश्वरी शर्मा, हिंदी विभाग, जम्मू विवि
पंजाब की तरह यहां भी पांचों भाषाओं में राजस्व विभाग का रिकॉर्ड होना चाहिए। इससे लोगों को समझने में आसानी होगी। - प्रो. डॉ. राज कुमार, लेखक व पूर्व विभागाध्यक्ष, जेयू
कश्मीरी के प्रचार-प्रसार से कौम बची रहेगी और तहजीब भी। कश्मीरी भाषा का विकास होने से समाचार पत्र निकलेंगे। बच्चों को भी इन भाषाओं में रोजगार मिल सकेगा।- प्रो. शहीद रमजान, श्रीनगर
डोगरी में राजकाज शुरू होने से डुग्गर संस्कृति का संरक्षण होगा। युवाओं के लिए रोजगार भी बढ़ेगा। - शिव देव मन्हास, अध्यक्ष, डोगरी विभाग जम्मू विवि
रिकॉर्ड उर्दू में ही चलेगा : सचिव
भाषाओं को मान्यता मिलने का मतलब यह नहीं कि राजस्व विभाग के सभी रिकॉर्ड हिंदी, डोगरी, कश्मीरी में बदल जाएंगे। यह संभव नहीं है। रिकॉर्ड उर्दू में ही चलेगा। किसी को कार्यालय में उर्दू समझ नहीं आएगी तो उसे अनुवाद करके बताया जा सकता है। हर भाषा में रिकॉर्ड लिखने की कवायद फिलहाल शुरू नहीं की जा रही है। हिंदी और अंग्रेजी का इस्तेमाल बाकी प्रदेशों की तरह यहां भी प्रशासनिक कार्यों में किया जा रहा है। -मनोज कुमार द्विवेदी, सचिव, सामान्य प्रशासनिक विभाग