पारा गिरने के साथ दिल दगा देने लगा है। अमूमन चालीस साल की उम्र में धोखा देने वाला दिन अब बीस साल में भी दम छोड़ रहा है।
संभाग के दूरवर्ती और पहाड़ी क्षेत्रों के अधिक ठंडे इलाकों में आने वाले दिनों में हार्ट अटैक के मामलों में यकायक वृद्धि होगी। जीएमसी में सामान्य में 5-7 मामले हार्ट अटैक के पहुंच रहे हैं जो अगले दो माह में दोगुने हो जाएंगे।
जिला स्तर के अस्पतालों में कार्डियो विशेषज्ञ के अभाव में हार्ट अटैक के मामलों में पीडि़त की जान राम भरोसे ही रहती है।
अधिक ठंड के दौरान शारीरिक गतिविधियां कम होने से खून में कंपोनेंट आपस में जुड़कर सीधे दिल पर हमला करते हैं। इससे खून की सप्लाई प्रभावित होने से हार्ट अटैक की आशंका बढ़ जाती है।
मोटापा, तनाव, ब्लड प्रेशर आदि हार्ट अटैक का कारण बनते हैं। इसमें अधिकांश मामलों में पुरुष पीडि़त हैं। नवंबर और दिसंबर में अधिक सर्दी होने के कारण ब्लड प्रेशर की शिकायत बढ़ेगी।
शहरी इलाकों के साथ संभाग के दूरवर्ती और पहाड़ी क्षेत्रों में डोडा, किश्तवाड़, रामबन, राजोरी, पुंछ इलाकों से मामले जीएमसी पहुंच रहे हैं।
इन इलाकों में ढांचागत सुविधाओं और विशेषज्ञों की कमी से ऐसे मरीजों की जान बचाना मुश्किल हो जाता है। जीएमसी में कार्यरत सीसीयू के एचओडी हृदय विशेषज्ञ डा. सुशील शर्मा के अनुसार अगले दो माह में लोग ठंड से बचकर खानपान पर ज्यादा तवज्जो देते हैं।
लेकिन सामान्य से ज्यादा खानपान करने से शरीर में कलोस्ट्रोल की मात्रा बढ़ जाती है, जो खून की सप्लाई को प्रभावित करती है। पारा कम होने से शरीर में कई हारमोन में बदलाव आता है।
इसमें न्यूरो हारमोन अहम होता है। युवाओं में हार्ट अटैक में स्मोकिंग, हाइपरटेंशन ज्यादा जिम्मेदार हैं। महिलाओं में हार्ट अटैक के कम होने का कारण उनका नियमित माहवारी होना रहता है। लेकिन माहवारी रुकने पर ऐसी महिलाओं में मोटापा बढ़ने लगता है, जो हार्ट अटैक का कारण बनता है।
लक्षण
1. शरीर में अचानक घबराहट आना
2. सिर में तेज दर्द, नब्ज कमजोर होना
3. अचानक सांस फूलने लगना
4. तनाव से खून की सप्लाई में प्रेशर बढ़ना
बचाव
1. हृदय रोगी चढ़ाई या ज्यादा चलने से परहेज करें
2. कोलोस्ट्राल बढ़ाने वाले पदार्थों का सेवन न करें
3. तत्काल प्रभाव से तंबाकू के साथ धूम्रपान छोड़े
4. फल सब्जियों का ज्यादा सेवन करें
5. रोजाना आधा घंटा टहलें, योग और कसरत अपनाएं