18 से 20 के झुंड में तारबंदी को पार कर भारतीय क्षेत्र में घुस रहे सूअर
गांव कोटली काजिंया के किसान कमलजीत सिंह ने बताया कि मैं धान की फसल की सिंचाई के लिए खेत में गया था। इसी दौरान जंगली सूअर ने हमला कर दिया। मुझे पेड़ पर चढ़कर जान बचानी पड़ी। लगभग एक घंटा पेड़ पर ही बैठे रहे। सूअर के जाने के बाद पेड़ से उतरे और डरते हुए घर पंहुचे।
किसान राजवंत सिंह ने बताया कि सीमावर्ती किसान पहले से ही भारत-पाकिस्तान के बीच तनावपूर्ण स्थिति को लेकर नुकसान झेल रहे हैं। बाढ़, बारिश और आंधी से धान की फसल गिरने से बड़ा नुकसान हुआ है। अब जंगली सूअरों का आतंक शुरू हो गया है। खेत में यह हमला कर दें तो जान मुश्किल में पड़ जाती है। सरकार और प्रशासन को सीमावर्ती किसानों की समस्या को गंभीरता से लेनी चाहिए।
पाकिस्तानी किसानों का षड्यंत्र...अपनी फसल बचाने के लिए भगा रहे इधर
ग्रामीणों ने बताया कि इतनी बड़ी तादाद में जंगली सूअरों की भारतीय क्षेत्र में घुसपैठ पहली बार देखी गई है। पहले इक्का-दुक्का जंगली सूअर ही सीमावर्ती गांवों के पास दिखते थे। पाकिस्तान में सूअरों को पकड़ने और मारने की मनाही है। बाढ़ से सीमा पार के जंगली इलाकों में पानी भर गया है।
इसलिए ये खेतों की ओर आ गए हैं। तारबंदी के पास पाकिस्तानी किसानों के भी खेत हैं और धान की फसल लगी है। अपनी फसल बचाने के लिए पाकिस्तानी किसान ढोल पीटकर और तेज आवाज वाले पटाखे चलाकर इन सूअरों को भारतीय क्षेत्र की ओर खदेड़ रहे हैं। इसके पीछे पाकिस्तानी किसानों का षड्यंत्र है कि तारबंदी पार कर जाने के बाद सूअर जल्द वापस नहीं आ सकेंगे।
कम संख्या में सूअर होने पर पिंजरा लगाकर कैद किया जाता है। ज्यादा होने पर इन्हें खदेड़ने के लिए पटाखों का इस्तेमाल किया जाता है। झुंड बड़े होने पर भी ये ऊपरी क्षेत्र का रुख करते हैं। फिलहाल, किसानों की समस्या को संज्ञान में लिया जा रहा है। अनिल अत्री, उपनिदेशक, वाइल्ड लाइफ वार्डन, जम्मू