किश्तवाड़ में बादल फटने के दौरान शहर में रेशमघर कॉलोनी निवासी मोहनलाल के ऊपर गमों का पहाड़ टूट गया है। मचैल माता के दर्शन के लिए रेशमघर से गई उनकी छोटी बेटी राही मेहरा,बड़ी बेटी के दोनों बच्चे,उसकी ननद के बच्चे,ननद सहित बेटी की सास का अभी तक कहीं कोई पता नहीं चल सका है।
शनिवार को बड़ी बेटी ममता मेहरा का परिजनों ने अंतिम संस्कार कर दिया। रात आठ बजे अमर उजाला की टीम जब रेशमघर के मकान नंबर 122 पर पहुंची तो अंदर का माहौल गमगीन नजर आया। बेटी ममता केे पिता मोहनलाल परिजनों के साथ बैठे थे। देखते ही बोले सब कुछ खत्म गया। ईश्वर से यही प्रार्थना है कि हमारे बच्चे जो मिल नहीं रहे वह मिल जाएं। अब माता रानी की ही कृपा का इंतजार है।
रेशमघर कॉलोनी में भरे पूरे परिवार के साथ रहने वाले मोहनलाल ने बड़ी बेटी की शादी बिश्नाह के बैनागढ़ में की थी। बीते 12 अगस्त को मचैल माता के दर्शन के लिए ममता मेहरा ससुराल से ही अपनी सास जित्तो देवी,ननद जिनी उसकी बेटी पीहू,बेटे गोकुल मेहरा और अपने बच्चों नैंसी मेहरा,चीकू के साथ दर्शन के लिए रवाना हुई थी।
इधर जम्मू से ममता की बहन राही मेहरा भी साथ में मचैल माता के दर्शन के लिए एक ही गाड़ी में रवाना हुए। इन सभी को यह नहीं पता था कि यह यात्रा उनके परिवार के लिए दु:खों का पहाड़ लेकर आने वाली है। पिता मोहनलाल के साथ बैठे भाई रमेश कुमार ने बताया कि जिस दिन घटना हुई। शाम तक इधर-उधर फोन पर अपनों की सलामती के लिए फोन पर हाल चाल लेने का प्रयास करते रहे लेकिन कोई जानकारी नहीं मिली। 15 अगस्त शुक्रवार को मित्रों के साथ किश्तवाड़ के लिए रवाना हुए।