नगरोटा बन टोल प्लाजा पर मारे गए आतंकियों के साथी ओजी वर्करों से बरामद चार मोबाइल कई राज खोलेंगे। इन्हें जांच के लिए एनआईए की लैब में भेजा गया है। ये मोबाइल जैश के लिए काम करने वाले मुख्य हैंडलर समीर डार और उसके दो साथियों के हैं।
इन मोबाइल फोन में पिछले दो महीनों से पाकिस्तान में आतंक के आकाओं और जम्मू-कश्मीर में मौजूद आतंकियों के बीच होने वाली तमाम बातचीत का खुलासा होगा। स्लीपर सेल के काम करने के तरीके भी सामने आएंगे।
बन टोल प्लाजा पर ओजी वर्कर समीर डार, सरताज मांटू और आसिफ को दबोचा गया था। इनके पास से तीन स्मार्ट फोन मिले हैं। साथ ही एक रियल मी का फ्रेश मोबाइल फोन भी मिला है। ये मोबाइल फोन 10 हजार से अधिक कीमत वाला है।
जो कश्मीर पहुंचने वाले इन आतंकियों को दिया जाना था। इस फोन के माध्यम से आतंकियों ने अपने नेटवर्क को चलाना था। वहीं ओजी वर्करों के तीन मोबाइल फोन में कई फोटो, वीडियो मिले हैं। साथ ही काफी कुछ डिलीट किया गया है। डिलीट डाटा वापस लिया जाएगा।
चंडीगढ़ से चल रहा था नेटवर्क
अब तक की जांच में यह सामने आया है कि आतंकी चंडीगढ़ से नेटवर्क ऑपरेट कर रहे थे। इसी तरह ही आतंकियों का नेटवर्क कहां-कहां चल रहा है, इन मोबाइल फोन के माध्यम से पता चलेगा।
दो महीने की बातचीत से आतंकियों के काम करने के तमाम तरीके और जानकारियां सामने आएंगी जिससे आतंकियों के स्लीपर सेल पर शिकंजा कसने में मदद मिलेगी। पाकिस्तान से आतंकियों के सीधे कनेक्शन की जानकारियां सामने आएंगी। ओजी वर्करों के पास जम्मू कश्मीर के नंबरों की पोस्टपेड सिम मिली है।