जम्मू-कश्मीर में बसने के करीब सात दशक बाद करीब एक लाख पश्चिमी पाकिस्तानी शरणार्थियों को राज्य के पंचायत चुनाव में वोट डालने का अधिकार मिल गया है। पहली बार वे आगामी कुछ दिनों में होने वाले उपचुनाव में वोट डालेंगे। सभी शरणार्थियों के नाम मतदाता सूची में शामिल करने के लिए मुख्य चुनाव अधिकारी की ओर से आयुक्तों को आदेश जारी किया गया है। अनुच्छेद 370 की वजह से पीआरसी तथा स्टेट सब्जेक्ट न होने की वजह से इन्हें राज्य की नागरिकता हासिल नहीं थी। अब तक इन्हें केवल लोकसभा चुनाव में ही वोट डालने का अधिकार प्राप्त था।
सूत्रों ने बताया कि इन रिफ्यूजियों की ओर से मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय में इसी महीने आपत्ति जताई गई कि अनुच्छेद 370 व 35 ए को हटे एक साल से अधिक का समय हो गया। इसके बाद भी उके नाम मतदाता सूची में शामिल नहीं किए गए। जनवरी महीने में मतदाता पुनरीक्षण अभियान के दौरान भी नाम सूची में शामिल नहीं किए गए।
अब राज्य के संयुक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी की ओर से सभी जिला पंचायत निर्वाचन अधिकारी (डीसी) को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन कानून में पीआरसी तथा स्टेट सब्जेक्ट शब्द हटा दिया गया है। साथ ही जम्मू-कश्मीर पंचायती राज कानून में भी इसका विलोप कर दिया गया है।
ऐसे में पश्चिमी पाकिस्तानी शरणार्थियों के नाम पंचायत मतदाता सूची में शामिल किए जाएं, किसी भी योग्य उम्मीदवार का नाम छूटने न पाए। सूत्रों ने बताया कि मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के आदेश के बाद सभी जिलों के जिला कलेक्टरों की ओर से नाम शामिल करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
26 हजार से अधिक परिवार
देश के विभाजन के दौरान वेस्ट पाकिस्तान रिफ्यूजी जम्मू, कठुआ, सांबा, उधमपुर में आकर बस गए थे। जम्मू में 22 हजार, कठुआ में 3204 समेत इन चार जिलों में लगभग 26 हजार हजार से अधिक परिवार रहते हैं। वेस्ट पाकिस्तान रिफ्यूजी वोटरों की संख्या लगभग एक लाख है।
सात दशक बाद पंचायत मतदाता सूची में रिफ्यूजियों का नाम शामिल हो पाया है। यह सब अनुच्छेद 370 हटने की वजह से संभव हो पाया है। इसका पूरा शरणार्थी समाज स्वागत करता है।
- लब्बा राम गांधी, अध्यक्ष-वेस्ट पाकिस्तान रिफ्यूजी एक्शन कमेटी